सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जीवित बुजुर्ग को सरकारी अभिलेखों में कागजों पर ‘मृत’ घोषित कर दिया गया।
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इस प्रशासनिक गलती का बड़ा खामियाजा अब पीड़ित बुजुर्ग को रोजाना उठाना पड़ रहा है। यह पूरा मामला सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बसडीलिया का है।
मार्च महीने से अचानक बंद हुई वृद्धावस्था पेंशन:
गांव बसडीलिया के रहने वाले पीड़ित नूरुल हसन को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन (pension) इस साल मार्च महीने से अचानक आनी बंद हो गई थी।
जब काफी समय तक बैंक खाते में पेंशन की राशि नहीं आई,
तो पीड़ित ने इसकी पड़ताल शुरू की।
जांच-पड़ताल के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को सन्न कर दिया। डुमरियागंज ब्लॉक कार्यालय से भेजी गई रिपोर्ट में जुलाई महीने में नूरुल हसन को आधिकारिक रूप से मृत दर्शित (Dead) कर दिया गया था।
जबकि सच्चाई यह है कि नूरुल हसन आज भी पूरी तरह जीवित हैं और
न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

दवाई और रोजमर्रा के राशन का खड़ा हुआ संकट:
बुजुर्ग नूरुल हसन के लिए सरकार से मिलने वाली यह वृद्धावस्था पेंशन ही उनके जीवन का मुख्य सहारा थी। इसी पेंशन के पैसों से वह अपनी बीमारियों की दवाइयां खरीदते थे और अपने रोजमर्रा के खाने-पीने का खर्च चलाते थे।
पेंशन बंद हो जाने के कारण अब उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित की आपबीती सुनकर हर कोई हैरान है कि कागजी गलती ने एक हंसते-खेलते इंसान को जीते जी लाचार बनाकर रख दिया है।
ग्राम सचिव और ब्लॉक अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल:
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब स्थानीय प्रशासन और ब्लॉक के अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
- बिना जांच रिपोर्ट तैयार करना:
- आखिर बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) या सही जांच-पड़ताल के एक जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित करने वाली रिपोर्ट किसने बनाई?
- लापरवाही की जवाबदेही:
- क्या इसमें ग्राम सचिव की सीधी लापरवाही है या ब्लॉक स्तर के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने भी आंखें मूंदकर रिपोर्ट आगे भेज दी?
कैमरे के सामने बोलने से कतराए जिम्मेदार अधिकारी:
जब इस बेहद संवेदनशील मामले पर मीडिया ने
जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की,
तो किसी भी अधिकारी ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिया।
हालांकि, ऑफ-कैमरा अधिकारियों का कहना है कि:
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
- जांच रिपोर्ट में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा,
- उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- जांच पूरी होने के बाद ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
पीड़ित को पेंशन बहाली और न्याय का इंतजार
फिलहाल पीड़ित नूरुल हसन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही कागजों पर उन्हें दोबारा ‘जीवित’ दर्ज किया जाएगा,
उनकी रुकी हुई पेंशन बहाल होगी और
लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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