सिद्धार्थनगर में चक्रवात ‘अर्णव’ से जनजीवन अस्त-व्यस्त, फसल बर्बाद

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। चक्रवात ‘अर्णव’ (Arnav) के कारण देर रात से जारी तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

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इस चक्रवाती तूफान का सबसे बुरा प्रभाव अन्नदाताओं पर पड़ा है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं के झोंको को झेल नहीं पाई और जमीन पर बिछ गई। पहले बेमौसम बारिश, फिर बाढ़ और अब इस चक्रवात की तिहरी मार से किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो चुकी है। अपनी खून-पसीने से सींची फसल को तबाह होते देख किसानों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।

किसानों का छलका दर्द: बर्बादी की कगार पर परिवार

स्थानीय किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं ने लगातार उनकी कमर तोड़कर रख दी है।

  • किसान वासिफ की आपबीती:
  • किसान वासिफ ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि सबसे पहले लगातार हुई बारिश ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद बाढ़ की मार झेलनी पड़ी। किसी तरह जो थोड़ी-बहुत फसल बची थी, उसे अब चक्रवात ‘अर्णव’ की तेज हवाओं और बारिश ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने सरकार से तुरंत आर्थिक सहायता देने की अपील की है।
  • किसान रामदेव पासवान का संकट:
  • छोटे किसान रामदेव पासवान के सामने अब परिवार के भरण-पोषण की गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। उनके पास खेती योग्य जमीन बहुत कम है और उनके पूरे परिवार का गुजर-बसर इसी धान की खेती पर निर्भर था। फसल पूरी तरह चौपट होने से वे बेहद परेशान हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

जिला प्रशासन अलर्ट: नुकसान के आकलन के निर्देश

किसानों की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है।

  • निगरानी के आदेश:
  • जिलाधिकारी शिवशरण अप्पा जीएन ने बताया कि मौसम विभाग के अलर्ट जारी करने के बाद से ही तहसील स्तर के अधिकारियों को मुस्तैद रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
  • क्षति का सर्वे:
  • फसलों को हुए नुकसान की पल-पल की जानकारी ली जा रही है।
  • जिलाधिकारी के अनुसार,
  • जिन भी क्षेत्रों से फसल क्षति की सूचना प्राप्त होगी,
  • वहां राजस्व और कृषि विभाग की टीमों को भेजकर सर्वे कराया जाएगा।

कब मिलेगी राहत?

लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं ने सिद्धार्थनगर के किसानों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की सर्वे टीमें कब तक नुकसान का सटीक आकलन पूरा करती हैं और प्रभावित किसानों को सरकारी मुआवजे की राहत राशि कब तक मिल पाती है।

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