बिना दर्द वाली गांठ को कभी न करें अनदेखा, ब्रेस्ट कैंसर का हो सकता है खतरा

हेल्थ डेस्क। भारत में महिलाओं के बीच ब्रेस्ट कैंसर (breast cancer) सबसे तेजी से फैलने वाला और सबसे आम कैंसर बनता जा रहा है। ग्लोबोकैन (GLOBOCAN) की साल 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में ब्रेस्ट कैंसर के करीब 1.9 लाख नए मामले दर्ज किए गए थे।

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यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं कि इस बीमारी से पीड़ित हर दो में से एक महिला की जान चली जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अधिकांश मामलों में इस बीमारी का पता बहुत देर से यानी स्टेज III या IV में चलता है। इस स्थिति का मुख्य कारण महिलाओं द्वारा शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना और डॉक्टर के पास जाने में देरी करना है।

दर्द न होने का मतलब यह नहीं कि खतरा नहीं है:

यह समझना बहुत जरूरी है कि हर गांठ ब्रेस्ट कैंसर नहीं होती है। फाइब्रोएडीनोमा या सिस्ट जैसी गांठें आमतौर पर सामान्य होती हैं और इनसे कोई बड़ा खतरा नहीं होता। लेकिन, ब्रेस्ट कैंसर का सबसे बड़ा और प्रमुख संकेत बिना दर्द वाली सख्त गांठ होती है, जिसके किनारे असमान या अनियमित होते हैं।

कई बार महिलाएं यह सोचकर निश्चिंत हो जाती हैं कि गांठ में दर्द नहीं है, जबकि यही लापरवाही भारी पड़ जाती है। दर्द का न होना हमेशा खतरे के टलने का संकेत नहीं होता, बल्कि हमारी चुप्पी और अनदेखी सबसे बड़ा खतरा बनती है।

इन जरूरी लक्षणों को कभी भी न करें नजरअंदाज:

यदि आपको अपने शरीर में निम्नलिखित में से कोई भी बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • ब्रेस्ट के आकार और शेप में बदलाव:
  • अचानक स्तन के आकार या बनावट में अंतर महसूस होना।
  • त्वचा में बदलाव:
  • स्तन की त्वचा पर गड्ढे पड़ना, संतरा जैसी त्वचा दिखना या त्वचा का सिकुड़ना।
  • निप्पल से जुड़े बदलाव:
  • निप्पल का अंदर की तरफ मुड़ना या उसमें से किसी तरह का खूनी या असामान्य डिस्चार्ज निकलना।
  • त्वचा संबंधी समस्याएं:
  • लालामी (redness), पपड़ीदार त्वचा या सूजन रहना।
  • अतिरिक्त गांठ:
  • स्तन के नीचे या बगल (armpit) में गांठ या सूजन महसूस होना।

40 की उम्र के बाद मैमोग्राम को दें प्राथमिकता:

एक मैमोग्राम (Mammogram) टेस्ट ट्यूमर का पता हाथों से छूकर जांच करने से कई साल पहले ही लगा सकता है। यही वजह है कि 40 की उम्र पार कर चुकी हर महिला को साल में कम से कम एक बार मैमोग्राम जरूर करवाना चाहिए। इस जांच को अपने कैलेंडर में किसी खास दिन की तरह मार्क कर लें।

इसके अलावा, यदि आपके परिवार में (जैसे मां या बहन को) पहले कभी ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर का इतिहास रहा है, तो इस बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताएं। इससे डॉक्टर समय रहते और उम्र से पहले ही जरूरी टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।

घबराएं नहीं, तुरंत एक्शन लें:

ब्रेस्ट कैंसर का नाम सुनते ही डर जाना स्वाभाविक है, लेकिन घबराने की जगह समय पर सही कदम उठाना जरूरी है। यदि कोई गांठ या बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच करवाएं ताकि खतरे को समय रहते टाला जा सके।

यह हमेशा याद रखें कि आपका परिवार आपको हमेशा व्यस्त नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित देखना चाहता है। इस अक्टूबर ‘कल देखेंगे’ या ‘बाद में दिखाएंगे’ जैसी टालमटोल वाली आदतों को बदलकर ‘आज ही डॉक्टर के पास जाऊंगी’ का संकल्प लें।

खुद जागरूक बनें और अपने आसपास की दूसरी महिलाओं को भी इसके प्रति प्रेरित करें।

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