नई दिल्ली। हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (Election Commissioner) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर देश भर में काफी चर्चा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में इस प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर लगातार कानूनी बहस जारी है, जिसके चलते इस महत्वपूर्ण मुद्दे को एक बड़ी संवैधानिक पीठ के पास भेजा गया है। भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराने की जिम्मेदारी इसी आयोग के कंधों पर होती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर इस शक्तिशाली पद पर अधिकारियों की नियुक्ति किस प्रकार की जाती है।
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चुनाव आयुक्त बनने के लिए क्या हैं अनिवार्य योग्यताएं?
चुनाव आयुक्त का पद कोई ऐसा पद नहीं है जिसके लिए आम नागरिक सीधे आवेदन कर सकें।
इसके लिए प्रशासनिक सेवा में लंबा अनुभव और उच्च पद पर कार्य करने का रिकॉर्ड अनिवार्य माना जाता है:
- सचिव स्तर का अनुभव:
- उम्मीदवार के लिए सबसे पहली और प्रमुख शर्त यह है कि वह भारत सरकार में सचिव (Secretary) स्तर के पद पर कार्यरत हो या पहले इस पद पर अपनी सेवाएं दे चुका हो।
- अनुभव और वरिष्ठता:
- केवल वही अधिकारी इस पद की दौड़ में शामिल हो सकते हैं जिन्हें प्रशासनिक और व्यवस्थापकीय कार्यों का वृहद अनुभव प्राप्त हो।
- नए कानून का प्रावधान:
- मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के लागू होने के बाद अब केवल वरिष्ठता की पुरानी परंपरा ही बाध्यकारी नहीं रही। यदि कोई अधिकारी योग्य है, तो उसे चुनाव आयोग के बाहर से भी इस पद के लिए चयनित किया जा सकता है।
कौन और कैसे करता है चुनाव आयुक्त का चयन?
वर्ष 2023 के नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए दो-स्तरीय प्रक्रिया अपनाई जाती है:
- सर्च कमेटी (Search Committee):
- कानून मंत्री की अध्यक्षता में एक सर्च कमेटी का गठन किया जाता है। इस कमेटी में दो अन्य सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल होते हैं। यह कमेटी देश भर के योग्य सचिव स्तर के अधिकारियों के नामों को छांटकर 5 उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार करती है।
- चयन समिति (Selection Committee):
- सर्च कमेटी द्वारा तैयार किया गया पैनल तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय चयन समिति के पास भेजा जाता है। इस समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। इसमें प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं। यह समिति पैनल में से नाम का चयन करती है और चाहें तो किसी अन्य योग्य व्यक्ति के नाम पर भी विचार कर सकती है।
- अंत में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की औपचारिक घोषणा की जाती है।
पहले क्या थी व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
- मार्च 2023 से पहले:
- संविधान में अलग से कोई स्पष्ट कानून न होने के कारण चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पूरी तरह से केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती थी।
- सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला:
- ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक संसद कानून नहीं बनाती, तब तक नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल रहेंगे।
- 2023 का नया कानून:
- संसद द्वारा पारित 2023 के कानून ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री को चयन समिति में शामिल कर दिया,
- जिस पर वर्तमान में कानूनी और राजनीतिक चर्चा जारी है।
कितना होता है कार्यकाल?
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल अधिकतम 6 वर्ष का होता है।
हालांकि, यदि कोई अधिकारी इस अवधि के दौरान 65 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है,
तो उसे 6 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही सेवानिवृत्त होना पड़ता है।
यानी दोनों सीमाओं में से जो भी पहले पूरी हो,
उसी के आधार पर सेवाकाल समाप्त माना जाता है।
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