इस देश में बिजली बिल आता है माइनस में, उल्टा सरकार देती है पैसा

डेस्क। क्या आप सोच सकते हैं कि आपके घर का बिजली बिल पॉजिटिव (+500 या +1000 रुपये) आने के बजाय माइनस (-200 रुपये) में आए? यानी बिजली इस्तेमाल करने का पैसा आपको देना न पड़े, बल्कि उल्टा बिजली कंपनी आपको पैसे दे! सुनने में यह किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन यूरोप के देश फिनलैंड (Finland) में ऐसा सचमुच हो चुका है।

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इस अनोखी घटना को ‘नेगेटिव इलेक्ट्रिसिटी प्राइसिंग’ (Negative Electricity Pricing) कहा जाता है।

आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि ऐसा क्यों और कैसे होता है।

फिनलैंड में क्यों माइनस में चली गईं बिजली की कीमतें?

फिनलैंड ने पिछले कुछ वर्षों में रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) और न्यूक्लियर पावर (परमाणु ऊर्जा) में बहुत भारी निवेश किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय जब पूरे यूरोप में ऊर्जा संकट गहराया, तब फिनलैंड ने अपने देश में बिजली उत्पादन को बहुत तेजी से बढ़ाया।

बिजली की कीमतें शून्य से नीचे जाने के मुख्य कारण:

  1. ओल्किलुओटो 3 (Olkiluoto 3):
  2. फिनलैंड में नए यूरोपियन न्यूक्लियर पावर प्लांट के शुरू होने से अचानक भारी मात्रा में बिजली बनने लगी।
  3. अनुकूल मौसम:
  4. तेज हवाओं के कारण पवन ऊर्जा (Wind Energy) और पिघलती बर्फ की वजह से हाइड्रो पावर (जल विद्युत) का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
  5. कम मांग और ज्यादा सप्लाई:
  6. मौसम सुहावना होने के कारण लोगों ने घरों में हीटर या एसी कम चलाए।
  7. इससे बिजली की मांग घट गई, लेकिन उत्पादन बहुत ज्यादा बढ़ गया।

नेगेटिव इलेक्ट्रिसिटी प्राइसिंग कैसे काम करती है?

बिजली को अन्य सामानों की तरह बहुत बड़ी मात्रा में स्टोर करके रखना बेहद मुश्किल होता है। इसलिए पावर ग्रिड को चलाने के लिए यह जरूरी है कि जितनी बिजली बन रही है, उतनी ही खर्च भी हो।

जब बिजली का उत्पादन मांग से बहुत अधिक हो जाता है, तो ग्रिड पर दबाव बढ़ जाता है। इस दबाव और संतुलन को बनाए रखने के लिए थोक बाजार (Wholesale Market) में बिजली की कीमतें माइनस में चली जाती हैं। इसका मतलब है कि बिजली बनाने वाली कंपनियां खरीदारों और उद्योगों को बिजली इस्तेमाल करने के लिए पैसे ऑफर करती हैं।

बिजली बनाने वाले पावर प्लांट को बंद क्यों नहीं कर दिया जाता?

आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि अगर बिजली ज्यादा बन रही है, तो पावर प्लांट को थोड़ी देर के लिए बंद क्यों नहीं कर देते?

इसके पीछे कई तकनीकी और आर्थिक कारण हैं:

  • न्यूक्लियर प्लांट को बंद करना मुश्किल:
  • बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को अचानक बंद करना और फिर से शुरू करना बहुत जटिल, खतरनाक और महंगा होता है।
  • सस्ता विकल्प:
  • पावर प्लांट को बंद करने और फिर से चालू करने में जितना भारी खर्च आता है,
  • उससे कहीं ज्यादा सस्ता कंपनियों के लिए यह होता है कि वे ग्राहकों को फ्री या माइनस रेट पर बिजली दे दें।
  • रिन्यूएबल सोर्स:
  • हवा और पानी से बनने वाली बिजली कुदरती होती है, जिसे तुरंत रोकना आसान नहीं होता।

क्या आम जनता को हर महीने मिलते हैं पैसे?

यहाँ यह ध्यान रखना जरूरी है कि थोक बाजार में कीमतें (electricity bills) माइनस होने का मतलब यह नहीं है कि हर आम नागरिक को सीधे उनके बैंक खाते में पैसे मिलेंगे।

उपभोक्ता को मिलने वाला फायदा उनके बिजली कनेक्शन के एग्रीमेंट (Contract) पर निर्भर करता है।

जिन लोगों ने ‘फ्लेक्सिबल या रियल-टाइम टैरिफ’ लिया होता है, उनके बिल में टैक्स और डिलीवरी चार्ज कटने के बाद काफी छूट मिलती है या बिल शून्य के करीब आ जाता है।

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