नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन (Satya Niketan) क्षेत्र में रविवार को एक बहुमंजिला पीजी (building) के अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह जाने से चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 6 बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है जबकि मलबे के नीचे कई छात्र दबे रहे। घटना के दिल दहला देने वाले सीसीटीवी फुटेज ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।
यह भी पढ़ें-क्या है Flash Flood, जानें क्यों आती है अचानक बाढ़?
हमारे देश के नगर निगमों और विभिन्न राज्यों के बिल्डिंग बाय-लॉज के तहत बहुमंजिला इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराना कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक 10 साल पुरानी इमारतों की जांच को बेहद जरूरी माना गया है। वहीं देश के अधिकांश हिस्से में 15 वर्ष की आयु पार कर चुकी इमारतों का तकनीकी निरीक्षण कराना सुरक्षा मानकों में प्राथमिक शर्त माना जाता है।

किसी भी निर्माण की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, उसमें अंदरूनी तौर पर कमजोरी आने लगती है। बिल्कुल नई यानी 5 साल तक की बिल्डिंग्स को बड़े ऑडिट की जरूरत भले न हो, लेकिन शुरुआती स्तर पर एक सामान्य बुनियादी निरीक्षण की सलाह दी जाती है। जब इमारत 15 से 30 वर्ष के दायरे में प्रवेश करती है, तब हर 3 से 5 साल के अंतराल पर विस्तृत ऑडिट कराना बहुत जरूरी हो जाता है। इस अवधि में पिलर और बीम में अंदरूनी सीलन, दरारें या लोहे की छड़ों में जंग लगना शुरू होता है। वहीं 30 साल से ज्यादा पुरानी संरचनाओं के लिए हर 3 साल में अनिवार्य जांच का प्रावधान है, ताकि किसी संभावित अनहोनी को समय रहते टाला जा सके।
अलग-अलग शहरों जैसे लखनऊ, दिल्ली या मुंबई के विकास प्राधिकरण अपनी स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और बहुमंजिला सोसायटियों की बहुलता को देखते हुए इन नियमों को और सख्त बना सकते हैं। कई कमर्शियल और हाई-राइज रिहायशी परिसरों के लिए ऑडिट की समयावधि सामान्य इमारतों से अलग तय की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य किसी इमारत की नींव, बीम, कॉलम और कंक्रीट की वास्तविक क्षमता का आकलन करना होता है। इससे न केवल समय रहते मरम्मत का काम कराया जा सकता है बल्कि समय पर मिली जानकारी से सत्य निकेतन जैसे हादसों को होने से रोका जा सकता है।
Tag: #nextindiatimes #SatyaNiketan #building




