सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर का डुमरियागंज थाना (police station) एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला जब्जुआ गांव निवासी गरीब बुजुर्ग कुटरु की मेहनत की जमा पूंजी से जुड़ा है। पीड़ित का दावा है कि उसने अपनी भैंस बेचकर जुटाए 40 हजार रुपये पड़ोसी गांव के श्रीराम को उधार दिए थे। श्रीराम ने एक महीने में रकम लौटाने का भरोसा दिया, लेकिन समय पूरा होने के बाद कथित तौर पर पैसे लौटाने में आनाकानी करने लगा।
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पीड़ित कुटरु का आरोप है कि न्याय की उम्मीद में उसने डुमरियागंज थाने का दरवाजा खटखटाया लेकिन उसकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई। दोबारा शिकायत करने पर थाने में तैनात सिपाही आदित्य यादव और इकराम पर आरोप है कि उन्होंने शिकायत पत्र पर ही जबरन समझौता करा दिया और पीड़ित का अंगूठा लगवा लिया। पीड़ित का गंभीर आरोप है कि दोनों सिपाहियों ने विपक्षी श्रीराम से कथित तौर पर पैसा लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया। मामला यहीं नहीं रुका।

पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन से भी शिकायत की। आरोप है कि शिकायत की जानकारी डुमरियागंज क्षेत्राधिकारी बृजेश वर्मा तक पहुंचने के बाद भी संबंधित पुलिसकर्मियों ने पीड़ित से दोबारा कथित तौर पर जबरन अंगूठा लगवा लिया।पीड़ित कुटरु का कहना है कि 40 हजार रुपये उसकी और उसकी पत्नी की पूरी जमा पूंजी थी, जिससे दोनों बुजुर्ग एक छोटी सी दुकान चलाकर अपना जीवन गुजारते हैं। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री से शिकायत करेगा।
वहीं पीड़ित द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर जब पुलिस अधिकारियों से कैमरे पर बयान लेने की कोशिश की गई, तो अधिकारियों ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। फिलहाल जब्जुआ निवासी पीड़ित ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने 40 हजार रुपये वापस दिलाने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस विभाग इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है।
(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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