एंटरटेनमेंट डेस्क। बॉलीवुड में कई अभिनेत्रियां ऐसी रहीं, जिन्होंने मुकाम तो खूब हासिल किए लेकिन निजी जिंदगी में आए वक्त के थपेड़ों ने उन्हें क्या से क्या बना दिया। आज जहां अभिनेत्रियों की जिंदगी इतनी लग्जरी से भरी है, वहीं एक वक्त था जब हिंदी सिनेमा में एक ऐसी हीरोइन आई जिसने अपने संघर्षों के दम पर फिल्मों में अपनी जगह बनाई। यहां तक कि इन्हें हिंदी सिनेमा की पहली ग्रेजुएट एक्ट्रेस कहा जाता है।
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दरअसल जिस एक्ट्रेस की हम बात कर रहे हैं, उनका नाम लीला चिटनिस है। 9 सितंबर, 1909 को लीला चिटनिस कर्नाटक के ब्राह्मण परिवार में जन्मीं। लीला चिटनिस पढ़े लिखे परिवार से आती थीं। लीला के पिता अंग्रेजी के प्रोफेसर थे, तो ऐसे में लीला चिटनिस खुद भी खूब पढ़ी लिखी थीं। उन्हें महाराष्ट्र की पहली ग्रेजुएट लेडी का खिताब मिला था।
15 या 16 की उम्र में उनकी शादी हो गई। वह चार बच्चों की मां बनीं लेकिन, अभिनय से उनका लगाव कम नहीं हुआ। उन्होंने ‘नाट्यमानवांतर’ नाम का मराठी थिएटर ज्वॉइन किया। यहां अभिनय और कॉमेडी प्ले करते हुए अपने अभिनय के शौक को पूरा करना शुरू किया। इसके बाद वह फिल्मों में आ गईं।

पति की शराब की लत ने लीला को परेशान कर दिया था। आखिरकार वह पति से अलग हो गईं और बच्चों की परवरिश में लग गई। इसके बाद लीला ने स्कूल में टीचर के तौर पर नौकरी शुरू की। धीरे-धीरे लीला का सफर सिनेमा की ओर बढ़ा। 4 बच्चों का पालन-पोषण और घर चलाना, आसान नहीं था। आखिरकार लीला चिटनिस को पहला ब्रेक ‘जेंटलमैन डाकू’ से मिला था, जिसमें उन्होंने पुरुषों की पोशाक पहनी थी। लीला ने यह किरदार बखूबी निभाया था। उनकी एक्टिंग से निर्देशक इतने प्रभावित हुए कि उनके पास फिल्मों की बाढ़ आने लगी। उस समय लीला अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर थीं कि, वह जिस भी फिल्म को हाथ लगातीं, वह चमक उठती।
लीला (Leela Chitnis) ने अपने करियर में हर तरह के रोल निभाए। उन्होंने कभी भी किसी किरदार से परहेज नहीं किया और फिर एक वक्त ऐसा आया, जब लीला सिनेमा की हिट मां बन गईं। साल 1948 में फिल्म शहीद में लीला ने पहली बार मां का किरदार निभाया और इस फिल्म में लीला ने दिलीप कुमार की मां के किरदार में दिखीं।
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