काठमांडू। भारत के कोलकाता से नेपाल के बिराटनगर के लिए पहली रेल माल ढुलाई सेवा शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। इस सर्विस को नेपाल (Nepal) के व्यापार, माल ढुलाई और परिवहन के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। इस रेलवे लाइन को भारत और नेपाल दोनों दे लिए फायदे का सौदा बताया जा रहा है। इससे भारत को नेपाल में रणनीतिक बढ़त मिलेगी।
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इसके साथ ही भारतीय व्यापारियों के लिए नेपाल के बाजार तक पहुंचने का नया रास्ता भी होगा। चारों ओर से जमीन से घिरा नेपाल भी इस रेल लाइन के जरिए भारत और दुनिया के बाकी देशों के साथ व्यापार को बढ़ा सकेगा। भारत ने इस रेलवे लाइन से चीन को भी पीछे छोड़ दिया है, जो लंबे समय से नेपाल तक सड़क और रेल संपर्क बहाल करने का प्रयास कर रहा है।
भारत-नेपाल पारगमन संधि के तहत तीसरे देशों से आयातित माल भारतीय क्षेत्र से होते हुए नेपाल की सीमा तक पहुंचाया जाता है। संधि के अनुसार नेपाल को तीसरे देशों से आयात और निर्यात के लिए भारतीय सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों का उपयोग करने की अनुमति है, जिसके तहत कोलकाता से बीरतनगर तक रेल से माल परिवहन शुरू हो गया है। 4 नवंबर 2025 को भारत के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ईसीटीएस) विनियमों में संशोधन किया, जिससे कोलकाता, हल्दिया और विशाखापत्तनम बंदरगाहों से रेल कार्गो आवागमन का दायरा विस्तारित हो गया।

कोलकाता स्थित नेपाल के महावाणिज्य दूतावास द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, “संशोधन ने कोलकाता, हल्दिया और विशाखापत्तनम के भारतीय बंदरगाहों से रेल द्वारा माल ढुलाई के दायरे का विस्तार किया है, जिससे नेपाल जाने वाले माल को बिराटनगर सीमा शुल्क तक रेल द्वारा ले जाया जा सकेगा।” अब पारगमन संधि के तहत रेल द्वारा माल ढुलाई केवल बीरगंज आईसीपी तक ही अनुमति थी। संशोधित प्रोटोकॉल के अनुसार, सभी मालगाड़ियां बिराटगर आईसीपी और नौतनवा से होकर गुजर सकेंगी। पहले, तीसरे देशों से रेल द्वारा केवल चार वस्तुओं – कोयला, क्लिंकर, सीमेंट और उर्वरक – का परिवहन किया जा सकता था।
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