नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने खाली हुई तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया है। यह फैसला टीएमसी के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद के राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद लिया गया है। आपको बता दें कि राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। आइए जानते हैं कि क्या एक सामान्य भारतीय नागरिक भी राज्यसभा का चुनाव लड़ सकता है?
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भारत के संविधान और भारत के चुनाव आयोग ने राज्यसभा (Rajya Sabha) उम्मीदवारों के लिए कुछ पात्रता शर्तों को तय किया है। उम्मीदवार को भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसकी आयु कम से कम 30 साल होनी चाहिए। उसका नाम देश के किसी भी संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में भी दर्ज होना चाहिए। इतना ही नहीं उम्मीदवार को केंद्र या फिर किसी राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद नहीं रखना चाहिए, जब तक की कानून द्वारा छूट न दी गई हो।
सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करते समय ₹10000 की सुरक्षा राशि जमा करनी होती है। अनुसूचित जाति या फिर अनुसूचित जनजाति श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों के लिए सुरक्षा जमा राशि ₹5000 है। यह राशि सही मायने में नामांकन शुल्क नहीं है बल्कि उम्मीदवार के चुनावी प्रदर्शन के अधीन वापसी योग्य सुरक्षा जमा राशि है।

हालांकि कानून किसी भी योग्य नागरिक को चुनाव लड़ने की अनुमति देता है, राज्यसभा चुनाव अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के जरिए आयोजित किए जाते हैं। आम जनता के बजाय संबंधित राज्य के विधानसभा के सदस्य राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करते हैं। वैध नामांकन को दाखिल करने के लिए एक उम्मीदवार को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत प्रस्तावक के रूप में राज्य के निर्वाचित विधायकों में से कम से कम 10% या फिर 10 विधायकों, जो भी कम हो का समर्थन प्राप्त करना होगा।
यानी किसी राजनीतिक दल के समर्थन या फिर पर्याप्त विधायकों के समर्थन के बिना एक आजाद उम्मीदवार के लिए चुनाव लड़ना काफी मुश्किल हो जाता है, चुनाव जीतना तो दूर की बात है। नामांकन के समय भुगतान की गई सुरक्षा जमा राशि तब वापस की जाएगी अगर उम्मीदवार चुनाव में डाले गए कुल वैध वोटों का कम से कम 16.6% हासिल करता है।
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