लाइफस्टाइल डेस्क। मां का दूध बच्चों के लिए अमृत समान होता है, ये तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि यह सिर्फ पोषण ही नहीं देता, बल्कि बच्चे के डीएनए की संरचना में भी कुछ बहुत खास बदलाव करता है? हाल ही में खून के नमूनों पर हुए एक शोध में यह दिलचस्प और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आइए जानते हैं क्या कहती है ये नई रिसर्च?
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शोधकर्ताओं ने पाया कि मां का दूध पीने वाले बच्चों में ‘DNA मिथाइलेशन’ नाम की एपिजेनेटिक प्रक्रिया के निशान काफी ज्यादा थे। सबसे खास बात यह है कि ये निशान शरीर के उन जींस पर अधिक पाए गए, जो सीधे तौर पर बच्चे की इम्युनिटी और उसके विकास से जुड़े होते हैं। यह बदलाव उन बच्चों की तुलना में औसतन कहीं अधिक था, जिन्हें मां का दूध नसीब नहीं हुआ था।

क्या है एपिजेनेटिक्स और ‘ऑफ स्विच’ का विज्ञान?
एपिजेनेटिक्स: यह हमारे जींस और हमारे आस-पास के पर्यावरण के बीच का तालमेल है। इसी आपसी असर से यह तय होता है कि कोई जीन कैसा व्यवहार करेगा।
डीएनए मिथाइलेशन: यह प्रक्रिया शरीर में एक ‘ऑफ स्विच’ की तरह काम करती है। इसका काम किसी भी जीन को खुद को अभिव्यक्त करने से रोकना होता है। यह प्रक्रिया भ्रूण के विकास, जीनोमिक स्थिरता और शरीर के अन्य जरूरी कामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हालांकि इस शोध में एक बात स्पष्ट की गई है- रिसर्च में डीएनए पर पड़े इन निशानों को तो देखा गया, लेकिन यह नहीं परखा गया कि इन एपिजेनेटिक बदलावों का असल में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता या उनके शारीरिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ा।
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