एंटरटेनमेंट डेस्क। जब भी हिंदी सिनेमा के बारे में बातचीत होती है ज्यादातर हीरो के बारे में ही होती है। किसी भी फिल्म को उसके लीड हीरो के नाम से ज्यादा जाना जाता है और याद भी रखा जाता है। लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि विलेन का भी फिल्म में उतना ही रोल होता है बल्कि विलेन ही हीरो की वैल्यू को बढ़ाता है।
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हिंदी सिनेमा में में ऐसे कई विलेन (villain) हुए हैं जिन्होंने इतनी शानदार एक्टिंग की कि दर्शकों को भी उनसे नफरत हो जाती थी। एक ऐसे ही विलेन थे जैक गॉड (Jack Gaud), जो बॉलीवुड में आए तो हीरो बनने के लिए थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर ही था।भारतीय नौसेना के पूर्व नाविक और बॉडी बिल्डर जैक गौड ने बॉलीवुड में मुख्य हीरो बनने की चाहत के साथ एंट्री की थी, लेकिन अपनी दमदार बॉडी की वजह से उन्हें विलेन और गुंडे के रोल ही मिलते रहे।
हालांकि, ‘करण अर्जुन’ (Karan Arjun) और ‘वास्तव’ जैसी फिल्मों में यादगार विलेन के रोल निभाकर उन्हें बड़ी कामयाबी मिली, लेकिन 1992 की एडवेंचर फिल्म ‘जंगल का बेटा’ में मुख्य हीरो का रोल निभाने का उनका सपना भी पूरा हुआ। जैक गॉड की आखिरी फिल्म खुदा कसम थी। जिसमें सनी देओल (Sunny Deol) ने लीड रोल प्ले किया था।

इस फिल्म में जैक ने गुंडे का किरदार निभाया था। हालांकि यह फिल्म उनके जीते जी रिलीज नहीं हो पाई और 42 की उम्र में उनकी मौत के 10 साल बाद यह रिलीज हुई। इस फिल्म की शूटिंग 1997 और 2004 के बीच हुई थी। प्रोडक्शन में कई बार देरी और टाइटल बदलने के बाद, फिल्म आखिरकार 26 नवंबर 2010 को रिलीज हुई। जैक ने 42 साल की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन अपने इस छोटे करियर में भी उन्होंने कई दमदार किरदार निभाए और बॉलीवुड का जाना पहचाना चेहरा बन गए।
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