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रविवार, जून 7, 2026

भारत-पाक बॉर्डर पर ही क्यों होती है ‘बीटिंग रिट्रीट’, चीन या बांग्लादेश सीमा पर क्यों नहीं

डेस्क। भारत की सीमाएं कई देशों से लगती हैं। पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में चीन, नेपाल और भूटान, जबकि पूर्व में बांग्लादेश और म्यांमार स्थित हैं। जब सीमा पर होने वाले किसी खास आयोजन की बात होती है, तो सबसे पहले अटारी-वाघा सीमा पर होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का नाम सामने आता है। पंजाब में स्थित अटारी-वाघा सीमा पर हर शाम एक खास समारोह आयोजित किया जाता है, जिसे बीटिंग रिट्रीट कहा जाता है।

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एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जब भारत की सीमाएं चीन, बांग्लादेश, नेपाल और अन्य देशों से भी लगती हैं, तो फिर ऐसा समारोह केवल भारत-पाकिस्तान सीमा पर ही क्यों आयोजित किया जाता है। ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर ही बीटिंग रिट्रीट जैसे कार्यक्रम क्यों होते हैं, चीन या बांग्लादेश बॉर्डर पर क्यों नहीं होते हैं?

Beating Retreat एक पारंपरिक सैन्य समारोह है। पुराने समय में युद्ध के दौरान शाम होने पर सैनिकों को युद्ध क्षेत्र से वापस बुलाने के लिए ढोल या बिगुल बजाया जाता था। इसी परंपरा को बाद में औपचारिक सैन्य कार्यक्रम का रूप दिया गया। अटारी-वाघा सीमा पर होने वाला बीटिंग रिट्रीट समारोह वर्ष 1959 से नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत की ओर से बीएसएफ और पाकिस्तान की ओर से पाकिस्तान रेंजर्स भाग लेते हैं। समारोह के दौरान दोनों देशों के सैनिक अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वजों को सूर्यास्त के समय नीचे उतारते हैं और सीमा के गेट बंद किए जाते हैं।

1947 के विभाजन के बाद दोनों देशों के बीच कई बार तनाव और युद्ध हुए हों, लेकिन अटारी-वाघा सीमा दोनों देशों के रिश्तों का एक जरूरी प्रतीक बनी रही। यह सीमा लंबे समय तक दोनों देशों के बीच प्रमुख भूमि मार्ग और संपर्क का केंद्र रही, जहां से व्यापार, यात्राएं और राजनयिक गतिविधियां संचालित होती थी। इसी वजह से यहां एक औपचारिक सैन्य समारोह की शुरुआत हुई, जो समय के साथ विश्व प्रसिद्ध बन गया।

भारत और चीन के बीच आज भी कई इलाकों को लेकर मतभेद बने हुए हैं और सीमा का अंतिम निर्धारण नहीं हो पाया है। ऐसे में वाघा बॉर्डर की तरह खुला और सार्वजनिक समारोह आयोजित करना आसान नहीं है। इसके अलावा भारत-चीन सीमा हिमालय के बेहद ऊंचे और दुर्गम इलाकों में स्थित है, जहां साल भर कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और कठिन मौसम बना रहता है। इन परिस्थितियों में रोजाना हजारों लोगों की मौजूदगी वाला कार्यक्रम आयोजित करना सही नहीं माना जाता है।

भारत-बांग्लादेश सीमा करीब 4,000 किलोमीटर लंबी है और कई राज्यों से होकर गुजरती है। यहां वाघा बॉर्डर जैसा कोई एक ऐसा प्रमुख सीमा बिंदु नहीं है, जो दोनों देशों की पहचान बन गया हो। भारत और बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार, सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इसलिए यहां सैन्य प्रदर्शन की जगह सहयोग और आपसी संबंधों को मजबूत करने वाली गतिविधियां ज्यादा देखने को मिलती हैं।

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