डेस्क। अक्सर देखा गया है कि आपसी विवाद के बाद पत्नी (Wife) अपने मायके चली जाती है और लंबे समय तक वापस नहीं लौटती। ऐसे में पतियों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस वजह के लगातार 1 साल से मायके में बैठी हो तो क्या कानूनी तौर पर तलाक लिया जा सकता है? आइए समझते हैं कि इस संवेदनशील मुद्दे पर हमारा भारतीय कानून और हिंदू विवाह अधिनियम पुरुषों को क्या अधिकार देता है।
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भारतीय कानून के मुताबिक अगर पत्नी बिना किसी वैध या ठोस कारण के अपनी मर्जी से पति का घर छोड़कर चली जाती है, तो इसे परित्याग (Desertion) माना जाता है। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत यदि कोई भी साथी लगातार 1 साल या उससे अधिक समय तक अपने जीवनसाथी का साथ छोड़ देता है तो पीड़ित पक्ष को कोर्ट जाने का पूरा हक है। ऐसे मामलों में पति अपनी पत्नी के इस व्यवहार को ‘परित्याग’ का पुख्ता आधार बनाकर अदालत में एकतरफा तलाक का मुकदमा आसानी से दायर कर सकता है।
लंबे समय तक पत्नी के मायके में रहने से केवल रिश्ता ही प्रभावित नहीं होता बल्कि पति को गहरे सामाजिक और मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ता है। कोर्ट के कई फैसलों में यह माना गया है कि बिना किसी ठोस कारण के पति को उसके वैवाहिक सुख से वंचित रखना एक प्रकार की ‘मानसिक क्रूरता’ (Cruelty) है।

अगर पति अदालत में यह साबित करने में सफल रहता है कि पत्नी के इस कदम से उसके आत्मसम्मान और मानसिक शांति को ठेस पहुंची है, तो जज इस क्रूरता के आधार पर भी तलाक को मंजूरी दे सकते हैं। विवाद बढ़ने पर पति के पास सीधे तलाक का केस फाइल करने के अलावा एक और सकारात्मक विकल्प होता है। पति चाहे तो हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 का सहारा ले सकता है, जिसे वैवाहिक अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) कहा जाता है।
इस याचिका के जरिए कोर्ट पत्नी को बिना किसी ठोस कारण के अलग न रहने और वापस ससुराल लौटने का निर्देश देती है। अगर इस अदालती आदेश के बाद भी पत्नी वापस नहीं आती, तो पति के लिए तलाक का दावा बहुत मजबूत हो जाता है। यहां यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कानूनी तौर पर एकतरफा तलाक की कोई भी अर्जी कोर्ट में तभी स्वीकार की जा सकती है, जब दोनों की शादी को कम से कम 1 वर्ष का समय पूरा हो चुका हो।
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