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Tuesday, May 5, 2026

दूध बेचने से लेकर सीएम की कुर्सी तक, आंसू ला देगी ममता बनर्जी की कहानी

बंगाल। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee भारतीय राजनीति का एक ऐसा चेहरा हैं जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है। दीदी के नाम से मशहूर ममता अपनी सादगी और जुझारू स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। मुख्यमंत्री होने के बावजूद वो आज भी अपने पुराने छोटे से घर में रहती हैं, साधारण हवाई चप्पल पहनती हैं और सरकारी सैलरी तक नहीं लेतीं। बहुत से लोग उनकी सादगी के बारे में तो जानते हैं, लेकिन उनके जीवन के कड़े संघर्ष से वाकिफ नहीं हैं।

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ममता बनर्जी का बचपन गरीबी में बीता। जब वह महज 9 साल की थीं, तभी उनके पिता जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे उनका निधन हो गया। पिता के जाने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपने छोटे भाई-बहनों के पालन-पोषण और मां की मदद करने के लिए उन्होंने दूध बेचने का काम भी किया। इतनी तंगी और मुश्किलों के बावजूद ममता ने कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। उन्होंने जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में ऑनर्स किया।

इसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री (MA) ली। उन्होंने बीएड (B.Ed) करने के साथ-साथ जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून (Law) की पढ़ाई भी पूरी की। ममता बनर्जी ने कॉलेज के दिनों में ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी और वह बेहद कम उम्र में ही महिला कांग्रेस की महासचिव बन गई थीं। 1984 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तब सबको हैरान कर दिया, जब उन्होंने जादवपुर सीट से सीपीएम के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह उस समय देश की सबसे युवा सांसद बनीं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति और सीपीएम के विरोध के तरीके को लेकर उनकी अपनी पार्टी से अनबन रहने लगी। उन्हें लगा कि कांग्रेस बंगाल में सही से लड़ाई नहीं लड़ रही है।1997 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और 1 जनवरी 1998 को अपनी खुद की पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) बना ली।

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