नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। Election Commission द्वारा घोषित परिणामों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है, जिसके बाद प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार बनना तय है। अब तक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी, लेकिन अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सत्ता परिवर्तन का दौर शुरू हो गया है।
यह भी पढ़ें-दूध बेचने से लेकर सीएम की कुर्सी तक, आंसू ला देगी ममता बनर्जी की कहानी
सरकार गठन की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम वर्तमान मुख्यमंत्री का इस्तीफा होता है. मतगणना के अंतिम नतीजे आने के बाद जब यह साफ हो जाता है कि मौजूदा सरकार अपना बहुमत खो चुकी है, तब निवर्तमान मुख्यमंत्री राजभवन जाकर अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपते हैं। पश्चिम बंगाल में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। हालांकि नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री को केयरटेकर के तौर पर काम जारी रखने का आग्रह कर सकते हैं।

बहुमत प्राप्त करने वाली पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम अपने नेता का चुनाव करना होता है। भाजपा के निर्वाचित विधायक एक औपचारिक बैठक करेंगे, जिसमें सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना जाएगा। चुना गया यही नेता आगे चलकर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेता है।
जब पार्टी अपने नेता का नाम तय कर लेती है, तो वह नेता राज्यपाल से मुलाकात का समय मांगता है। राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। बहुमत वाली पार्टी का नेता राज्यपाल को अपने विधायकों के समर्थन की सूची सौंपता है और सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश करता है। यदि किसी एक पार्टी को बहुमत न मिले, तो गठबंधन की स्थिति में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। राज्यपाल संतुष्ट होने के बाद सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने का निमंत्रण देते हैं। राज्यपाल द्वारा निमंत्रण मिलने के बाद शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी शुरू होती है।
Tag: #nextindiatimes #Election #WestBengal




