एंटरटेनमेंट डेस्क। हिंदी सिनेमा में 40 और 50 का दशक वो दशक था, जब सिनेमा में अच्छी फिल्में बनने का दौर शुरु हो रहा था। ये वही दौर था जब सिनेमा धीरे-धीरे अपने पांव पसार रहा था। एक दौर था जब महिलाएं गाती थीं, तो इसे समाज में खराब माना जाता था लेकिन फिर इसी बीच एक Singer आईं, जिन्होंने सिनेमा की परिभाषा तो बदल ही डाली।
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पिता को दिए एक वादे की खातिर उन्होंने सालों तक अपनी तस्वीर नहीं खिंचवाई, तो उनकी आवाज पर पूरी दुनिया नाचती थी, लेकिन उनका चेहरा एक रहस्य था। ‘मेरे पिया गए रंगून’ से लेकर ‘कजरा मोहब्बत वाला’ जैसे आइकोनिक गाने वाले और खूब शोहरत पाने वाली इस महान गायिका को जब आशा और लता जैसी गायिकाएं देखतीं, तो उन्हें प्रेरणा मानती थीं।

14 अप्रैल 1919 को शमशाद बेगम (Shamshad Begum) का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ था। हालांकि कुछ इतिहासकारों के मुताबिक, लाहौर (ब्रिटिश इंडिया) में हुआ था। उस दौर में सिनेमा की पहुंच लाहौर से लेकर कलकत्ता तक हुआ करती थी। शमशाद बेगम का बचपन तंगहाली में बीता। पिता की आर्थिक स्थित ज्यादा अच्छी नहीं थी।
शमशाद बेगम का शुरू से ही संगीत की ओर झुकाव रहा। जब वह 10 साल की थीं, तभी से गाने गाया करती थीं। हालांकि पिता को शमशाद का गाना ज्यादा पसंद नहीं था। वह नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी गाना-बजाना करे। हालांकि आसपास रहने वाले लोग शमशाद की आवाज से परिचित थे और उनकी आवाज को काफी पसंद करते थे। इस बीच शमशाद बेगम के चाचा ने उनकी मदद की। वह उन्हें गुपचुप तरीके से ऑडिशन के लिए ले गए। इसके बाद उन्हें ‘जेनोफोन’ म्यूजिक कंपनी ने चुन लिया।
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