डेस्क। इतिहास के पन्नों में दर्ज युद्ध और संघर्ष की घटनाओं के बीच Ceasefire या युद्धविराम एक ऐसी कड़ी है, जो हिंसा की आग को कुछ पल के लिए शांत करने का प्रयास करती है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के दौरान ट्रंप द्वारा सीजफायर की अवधि को बढ़ाए जाने की खबर ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है।
यह भी पढ़ें-समझें क्या होता है सीजफायर और क्या होते हैं इसके नियम?
दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और शुरुआती युद्धविरामों में से एक ‘क्रिसमस ट्रूस’ है, जो दिसंबर 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुआ था। यह घटना इतिहास में दर्ज है क्योंकि यह दुनिया में पहली बार सीजफायर था। यह किसी सरकारी आदेश के बजाय सैनिकों की मानवीय संवेदनाओं से पैदा हुआ था। वेस्टर्न फ्रंट पर आमने-सामने की खाइयों में डटे जर्मन और ब्रिटिश सैनिकों ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अघोषित रूप से युद्ध रोक दिया था।

सैनिकों ने अपनी खाइयों में क्रिसमस ट्री सजाए और कैरल गाना शुरू किया। ब्रिटिश सैनिकों ने भी इसका जवाब सकारात्मक रूप से दिया और देखते ही देखते दुश्मन फौजों के बीच से गोलियों की आवाजें गायब हो गईं। क्रिसमस ट्रूस के दौरान का नजारा किसी कल्पना से कम नहीं था।जहां कुछ घंटे पहले एक-दूसरे पर गोलियां चलाई जा रही थीं। वहीं अब सैनिक खाइयों से बाहर निकलकर एक-दूसरे से हाथ मिला रहे थे। उन्होंने न केवल एक-दूसरे को उपहार बांटे, बल्कि साथ मिलकर फुटबॉल भी खेला।
क्रिसमस ट्रूस मानवीय एकता का प्रतीक बना, लेकिन इसका सैन्य असर बहुत कम समय के लिए रहा। एक हफ्ते के शांतिपूर्ण माहौल के बाद युद्ध की विभीषिका फिर से शुरू हो गई। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुई यह संधि बताती है कि सीजफायर हमेशा युद्ध के अंत की गारंटी नहीं होता है।
Tag: #nextindiatimes #Ceasefire #DonaldTrump




