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Tuesday, March 10, 2026

भारत में घरेलू हिंसा को लेकर कितना सख्त है कानून, जानें कितनी मिलती है सजा?

डेस्क। घरेलू हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जो न केवल महिलाओं को बल्कि पुरुषों को भी प्रभावित करती है। domestic violence शारीरिक, मानसिक, यौन और भावनात्मक रूप में हो सकती है। घरेलू हिंसा के कारण शिकार व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ता है।

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हालांकि भारतीय कानून ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन कई बार पीड़ितों को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होती। घभारत में घरेलू हिंसा से निपटने के लिए प्रमुख कानून “घरेलू हिंसा (Protection of Women from Domestic Violence) अधिनियम, 2005” है। इस अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। इस अधिनियम के तहत महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, यौन और आर्थिक हिंसा से सुरक्षा प्रदान की जाती है।

अगर आप घरेलू हिंसा का शिकार हो रहे हैं, तो सबसे पहले आपको पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 के तहत पति या अन्य रिश्तेदारों द्वारा की जाने वाली क्रूरता और हिंसा को अपराध माना जाता है। पुलिस आपके द्वारा दी गई शिकायत पर कार्रवाई करेगी और आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सकती है।

घरेलू हिंसा का शिकार होने पर महिला घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत न्यायालय से संरक्षण आदेश, पुनः स्थापित करने का आदेश, और आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकती है। महिलाओं के लिए कई हेल्पलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनसे वे तत्काल मदद प्राप्त कर सकती हैं। जैसे कि राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग से संपर्क किया जा सकता है। अगर आप कानूनी मदद नहीं उठा पा रही हैं, तो आप मुफ्त कानूनी सहायता के लिए राज्य या केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों का लाभ ले सकती हैं।

Tag: #nextindiatimes #domesticviolence #IPC

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