डेस्क। आज महात्मा गांधी भारतीय करेंसी (Indian Currency) की पहचान हैं लेकिन आजादी से पहले इन नोटों पर गांधी जी नहीं बल्कि किसी और की तस्वीर होती थी। दरअसल भारतीय नोटों की कहानी में चेहरे बदले हैं, फैसले बदले हैं और इस बदलाव के पीछे देश की सोच और पहचान छिपी रही है। आइए जानें कि महात्मा गांधी से पहले नोट पर किसका चेहरा छपा था?
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भारत में कागजी मुद्रा की शुरुआत औपनिवेशिक दौर में हुई। उस समय नोट केवल लेन-देन का जरिया नहीं थे बल्कि सत्ता का प्रतीक भी माने जाते थे, इसलिए ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय नोटों पर अंग्रेज शासकों की तस्वीरें छापी जाती थीं। ब्रिटिश राज में जारी होने वाले भारतीय नोटों पर सबसे पहले किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी।

उनके बाद किंग जॉर्ज षष्ठम के चित्र वाले नोट प्रचलन में आए। ये नोट ब्रिटेन में छपते थे और इन्हें भारत में चलन के लिए भेजा जाता था। इन नोटों पर अंग्रेजी राजशाही की स्पष्ट छाप दिखती थी, जो उस दौर की राजनीतिक हकीकत को दर्शाती थी। आजादी के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटों पर अशोक स्तंभ के सिंह चिह्न को प्रमुखता दी। साथ ही खेती, उद्योग, विज्ञान और विकास से जुड़े चित्रों को नोटों की पहचान बनाया गया।
महात्मा गांधी की तस्वीर पहली बार 1969 में नोटों पर दिखाई दी। 1987 में जब 500 रुपये का नोट दोबारा जारी किया गया, तब उस पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाई गई लेकिन असली बदलाव 1996 में आया, जब RBI ने महात्मा गांधी सीरीज शुरू की। इसके बाद से भारत में जारी होने वाले सभी नोटों पर गांधी जी का चेहरा अनिवार्य रूप से छपने लगा।
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