डेस्क। बिसरा (Viscera) शरीर के अंदरूनी अंगों और उनसे जुड़े सैंपल को कहा जाता है, जिन्हें पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षित रखा जाता है। आमतौर पर जब डॉक्टरों को पोस्टमार्टम से मौत की असली वजह साफ तौर पर पता नहीं चलती, तब वह आगे की जांच के लिए बिसरा प्रिजर्व कर लेते हैं। इसमें शरीर के ऐसे हिस्सों को सुरक्षित रखा जाता है, जिससे यह पता चल सके कि मौत किस कारण हुई है।
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फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स बाद में इन सैंपल्स की लैब में गहन जांच करते हैं। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच करते हैं। इसके लिए छाती और पेट के हिस्से को खोलकर आंतरिक अंगों की स्थिति देखी जाती है। इसी दौरान कुछ अंगो और फ्लूड्स के सैंपल सुरक्षित रखे जाते हैं।आमतौर पर इनमें पेट और उसकी सामग्री, आंतों का हिस्सा, लिवर, किडनी, दिल, फेफड़े और खून के सैंपल शामिल हो सकते हैं।

कई मामलों में यूरिन, वीर्य और अन्य जैविक नमूने भी लिए जाते हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स इन सैंपल्स की केमिकल जांच करके यह पता लगाते हैं कि शरीर में किसी जहरीले पदार्थ या दवा का असर तो नहीं था। बिसरा जांच फॉरेंसिक साइंस का हिस्सा होती है। पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षित किए गए सैंपल को सील करके फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा जाता है; जहां एक्सपर्ट्स रासायनिक परीक्षण करते हैं।
अगर किसी व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ खाया पिया या सूंघा हो तो उसका असर शरीर के अंदरूनी अंगों पर दिखाई देता है. जांच के दौरान यही पता लगाया जाता है कि शरीर में कौन सा केमिकल या टॉक्सिक पदार्थ मौजूद था और उसका असर कितना था। एक्सपर्ट के अनुसार बिसरा सैंपल की जांच तय समय सीमा के अंदर की जाती है, ताकि रिपोर्ट ज्यादा सटीक आ सके।
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