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Tuesday, May 12, 2026

दूसरे विश्वयुद्ध में बनीं जासूस, हुईं भुखमरी का शिकार; पढ़ें हॉलीवुड की ब्यूटी क्वीन की दास्तां

एंटरटेनमेंट डेस्क। ऑड्री हेपबर्न (Audrey Hepburn) जिन्होंने सिनेमा में ऐसे किरदार निभाए जो वास्तव में उनके निजी व्यक्तित्व को भी उजागर करती थी। वह फिल्मों में जैसे मजबूत और आजाद ख्यालों की दिखती थीं, असल जिंदगी में भी वैसी ही थीं। ऑड्री हेपबर्न ने अभिनय की दुनिया में बेशुमार सफलता हासिल की। वह हॉलीवुड की तीसरी सबसे सफल फीमेल स्टार थीं।

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वह अपनी बेहतरीन अदाकारी के साथ-साथ फैशन सेंस के लिए भी जानी-जानी थीं। वह एकेडमी अवॉर्ड (Oscar), गोल्डन ग्लोब और बाफ्ता अवॉर्ड जीतने वाली पहली अभिनत्री थीं। माता-पिता के तलाक के बाद ऑड्री मां के साथ नीदरलैंड में रहने गईं लेकिन यहां भी उन्हें सुकून न मिला। 1940 में नाजियों ने नीदरलैंड पर हमला कर दिया था। उन्होंने यातना-भुखमरी देखी और मुश्किलें झेलीं। उस वक्त वह 11 साल की थीं।

इतना ही नहीं उनके परिवार ने भी काफी कुछ झेला है। उनके चाचा को फांसी दे दी गई। सौतेले भाई को नाजी मजदूर शिविर में भेजा गया। इतना कुछ झेलने के बाद ऑड्री की मां ने फैसला किया कि वह प्रतिरोध आंदोलन का समर्थन करेंगी। इस उथल-पुथल भरी जिंदगी के बीच ऑड्री ने अपने पैशन को फॉलो किया। उन्होंने डांस सीखा, स्टेज परफॉर्मेंस दीं और फिर उन पैसों को प्रतिरोध आंदोलन में लगाया। यही नहीं, कुछ उन्हें नाजियों के खिलाफ जासूस भी बताते हैं। वह 15 की उम्र में नाजियों से छुप-छुपकर ब्रिटिश पायलटों तक संदेश और खाना पहुंचाती थीं।

जब द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म हुआ तो वह लंदन आ गईं। ज्यादा पतली होने की वजह से बैले डांस में करियर बनाना मुश्किल हो गया था। इसलिए उन्होंने मॉडलिंग और फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई, छोटे-मोटे रोल किए। इसके बाद उन्होंने हॉलीवुड की ओर रुख किया और उन्हें करियर को मोड़ देने वाली पहली फिल्म Gigi मिली जिसकी सफलता के बाद हॉलीवुड के दरवाजे हमेशा-हमेशा के लिए ऑर्डी के खुल गए।

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