पटना। एक मां की ‘खामोश मेहनत और संघर्ष’, जिसने अभावों और चुनौतियों के बीच एक चैंपियन को गढ़ दिया। यह कहानी है समस्तीपुर के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) की मां आरती सूर्यवंशी के संघर्ष और त्यागमयी स्वरूप की। वैभव के बल्ले की गूंज और स्ट्रोक के पीछे मातृशक्ति है। मैदान से बाहर गेंद को पहुंचाने के पीछे मां की ऊर्जा है।
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वैभव मां के करीब हैं। ट्रेनिंग और सपने के बीच कभी समय बाधा न बने, इसके लिए मां आरती अपनी सुख-सुविधाओं और सहूलियत पीछे छोड़ चुकी थीं। वह बताती हैं कि वैभव को अभ्यास के लिए समय पर मैदान में पहुंचाना उनकी पहली प्राथमिकता रही। उन्होंने कभी अपनी नींद की चिंता नहीं की।देर रात तक घर के काम निपटाने के बाद भी वह कुछ घंटों की नींद लेकर तड़के उठ जाती थीं और आज भी जब वैभव मैदान से दूर घर में होते हैं तो उनकी दिनचर्या पहले जैसी ही होती है।

जब वैभव के प्रशिक्षण का दायरा बढ़ा और उन्हें समस्तीपुर से पटना जाकर ट्रेनिंग लेनी पड़ी, तब आरती सूर्यवंशी की जिम्मेदारी और कठिन हो गई। संघर्ष का दायरा भी जिला से निकलकर राजधानी तक पहुंच गया। पटना की लंबी यात्रा के लिए उन्हें सामान्य दिनों से भी जल्दी उठना पड़ता था।उन्होंने सुनिश्चित किया कि वैभव को कभी बाहर का भोजन न करना पड़े।
सफर की थकान के बावजूद, उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता था कि वैभव बिना किसी तनाव अपनी ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित कर सके। समस्तीपुर के एक छोटे से कस्बे ताजपुर से निकलकर क्रिकेट की दुनिया में चमक बिखेरने वाले वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे केवल उनकी मेहनत और पिता के संघर्ष से बढ़कर मां का समर्पण और तपस्या है।
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