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Thursday, May 14, 2026

वर्दी की लाचारी और एक मां की जंग, महिला होमगार्ड ने कमांडेन्ट पर लगाया उत्पीड़न का आरोप

सिद्धार्थनगर। खाकी वर्दी जो सुरक्षा और न्याय का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन क्या हो जब उसी वर्दी के भीतर बैठा एक जिम्मेदार अधिकारी भक्षक बन जाए? आज कहानी एक ऐसी महिला Home Guard की है, जो न केवल समाज की सुरक्षा के लिए लड़ रही है, बल्कि अपने घर के भीतर एक दिव्यांग और बीमार बच्चे की जिंदगी के लिए भी जद्दोजहद कर रही है।

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आरोप है कि उसकी इस मजबूरी का फायदा कोई और नहीं, बल्कि उसके विभाग का कमांडेन्ट उठा रहा है। भ्रष्टाचार और मानसिक उत्पीड़न का यह खेल पिछले कई महीनों से जारी है। एक तरफ सिस्टम की संवेदनहीनता है, तो दूसरी तरफ एक माँ का संघर्ष। आरोप है कि कमांडेन्ट ने न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक तौर पर भी महिला को प्रताड़ित किया है।

पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाने पहुंची पीड़िता के अनुसार वह सिंगल मदर है और उसका छोटा बच्चा अपाहिज होने के साथ ही हृदय रोगी से ग्रस्त है जिसका इलाज जारी है और बच्चे को अधिक देखभाल की जरूरत है। ऐसे में वह ड्यूटी के साथ मां की फर्ज भी निभा रही है लेकिन विभाग के उच्चाधिकारी मौके का फायदा उठाकर उसका उत्पीड़न कर रहे हैं। ड्यूटी लगवाने के नाम पर रिश्वत की मांग, ने विभाग की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल यह है कि क्या नियम और कायदे सिर्फ कमजोरों के लिए हैं? क्या एक दिव्यांग बच्चे की मां को न्याय मिलेगा या रसूखदार अधिकारी अपनी कुर्सी की ताकत से इस आवाज को दबा देंगे? इस महिला ने अब इंसाफ की गुहार प्रशासन से लगाई है। देखना यह है कि क्या व्यवस्था इस ‘सिंगल मदर’ के आंसुओं की कीमत समझेगी?

(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)

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