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Saturday, May 16, 2026

नस्लीय टिप्पणी करने पर कितनी होती है सजा; जिसको लेकर विवादों में घिरे अर्शदीप

मुंबई। Arshdeep Singh हाल ही में एक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कथित तौर पर उन्हें तिलक वर्मा के बारे में कुछ टिप्पणी करते हुए दिखाया गया है। उस वीडियो में अर्शदीप कथित तौर पर तिलक वर्मा को ‘अंधेरे’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए संबोधित कर रहे हैं और मजाक में उन्हें सनस्क्रीन लगाने की भी सलाह दे रहे हैं।

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भारत में किसी व्यक्ति के खिलाफ नस्लीय, जाति आधारित या फिर भेदभावपूर्ण टिप्पणी करने पर गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसमें कारावास और आर्थिक जुर्माना शामिल है। भारतीय कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जो जाति, नस्ल, जातीयता, धर्म या फिर क्षेत्रीय पहचान के आधार पर होने वाले अपमान या फिर तिरस्कार को रोकने के लिए बनाए गए हैं।

टिप्पणी की प्रकृति और पीड़ित की पहचान के आधार पर खास कानून और सामान्य अपराधिक प्रावधान दोनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सजा के तौर पर 6 महीने से लेकर 5 साल तक का कारावास और साथ ही आर्थिक जुर्माना भी हो सकता है। जाति आधारित अपमान से निपटने वाले सबसे मजबूत कानूनों में से एक है अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम, 1989।

इस अधिनियम की धारा 3(1) (r) के तहत किसी सार्वजनिक स्थल पर अनुसूचित जाति या फिर अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का जानबूझकर अपमान करना या फिर उसे नीचा दिखाना एक आपराधिक अपराध माना जाता है। दोषी पाए जाने पर आरोपी को 6 महीने से लेकर 5 साल तक के कारावास और साथ ही जुर्माने की सजा हो सकती है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 153A उन काम या फिर बयान से संबंधित है जो अलग-अलग समुदाय, नस्लों, धर्म या फिर भाषाई समूहों के बीच नफरत, दुश्मनी या फिर भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। दोषी पाए जाने पर आरोपी को 3 साल तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।

Tag: #nextindiatimes #ArshdeepSingh #IPL2026

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