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Tuesday, April 28, 2026

इन देशों में पार्टी छोड़ते ही चली जाती है सदस्यता, बेहद सख्त है दलबदल कानून

डेस्क। लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का महत्व सर्वोपरि है लेकिन जब नेता निजी स्वार्थ या अवसरवाद या किसी भी वजह से रातों-रात अपनी पार्टी बदल लेते हैं, तो मतदाताओं के भरोसे को गहरा धक्का लगता है। भारत में हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे ने एक बार फिर दल-बदल कानून की प्रासंगिकता पर बहस छेड़ दी है।

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बांग्लादेश में Anti Defection Law को लेकर नियम दुनिया के सबसे सख्त कानूनों में से एक हैं। यहां का संविधान किसी भी जन प्रतिनिधि को पार्टी के खिलाफ बगावत करने की खुली छूट नहीं देता है। यहां का कानून राजनेताओं को पार्टी के अनुशासन में रहने के लिए बाध्य करता है, जिससे सदन की स्थिरता बनी रहती है।

केन्या में दल-बदल विरोधी कानून का दायरा काफी विस्तृत है। वहां के संविधान का आर्टिकल 40 स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है कि यदि कोई जन प्रतिनिधि अपनी मूल पार्टी का साथ छोड़ता है, तो उसे संसद की अपनी सीट खाली करनी अनिवार्य होगी। सिंगापुर के कानून के मुताबिक यदि कोई सदस्य पार्टी छोड़ता है या उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है, तो उसे अपनी सीट तुरंत प्रभाव से खाली करनी पड़ती है।

दक्षिण अफ्रीका के संविधान का अनुच्छेद 47 दल-बदल करने वालों के लिए काल साबित होता है। वहां जैसे ही कोई सदस्य अपनी पार्टी छोड़ता है, सदन की उसकी सदस्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है। यूके और कनाडा में दलबदल विरोधी कोई विशेष कानून नहीं है। वहां ‘क्रॉसिंग द फ्लोर’ या ‘क्रॉसिंग द लाइन’ की परंपरा है, जहां सांसद अपनी सीट छोड़कर विपक्ष की तरफ बैठ सकते हैं। यूरोप के अधिकांश देशों में दल-बदल को काफी गंभीरता से लिया जाता है।

Tag: #nextindiatimes #AntiDefectionLaw #Politics

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