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रविवार, जून 7, 2026

मदरसा खोलने के क्या हैं नियम, जानें कहां से मिलती है इसकी परमिशन?

डेस्क। पूरे भारत में छात्रों को धार्मिक और शैक्षिक शिक्षा देने में मदरसों की भी एक बड़ी भूमिका है। हालांकि काफी लोग मदरसा शुरू करने और उसे चलाने से जुड़ी कानूनी जरूरतों के बारे में नहीं जानते। एक आम सवाल यह है कि क्या इसे चलाने के लिए किसी खास लाइसेंस की जरूरत होती है?

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मदरसा (Madrasa) चलाने के लिए उस तरह के बिजनेस लाइसेंस की जरूरत नहीं होती जो कमर्शियल संस्थानों के लिए चाहिए होता है। हालांकि अगर संस्थान मान्यता प्राप्त योग्यताएं देना चाहता है, सरकारी मदद पाना चाहता है या फिर छात्रों को स्कॉलरशिप और शैक्षिक फायदे दिलाना चाहता है तो उसे संबंधित राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता या फिर रजिस्ट्रेशन लेना होगा। ऐसी मान्यता के बिना संस्थान को गैर मान्यता प्राप्त मदरसा माना जाता है और वह बिना आधिकारिक शैक्षिक दर्जे के स्वतंत्र रूप से काम करता है।

मान्यता की प्रक्रिया राज्य स्तर पर तय सरकारी निकायों द्वारा की जाती है। मुख्य अधिकारी राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड होता है। जैसे उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड या फिर बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड। जिला स्तर पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का कार्यालय आवेदन प्रोसेस करने, निरीक्षण करने और बोर्ड के साथ तालमेल बिठाने के लिए मुख्य नोडल एजेंसी के तौर पर काम करता है।

मान्यता के लिए योग्य होने के लिए मदरसे के पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा होना चाहिए। इसमें क्लासरूम, जमीन या फिर इमारत और बुनियादी शैक्षिक सुविधा शामिल है। कई राज्यों में नियमों के तहत संस्थान को बैंक खाते में रिजर्व फंड या फिर सिक्योरिटी डिपाजिट भी रखना होता है। यह फंड वित्तीय सुरक्षा के तौर पर काम करता है और अक्सर मदरसा बोर्ड और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा तय नियमों के मुताबिक ही रखा जाता है।

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