डेस्क। हाल ही में भारत-चीन (china) सीमा विवाद को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक के एक बयान ने देश में सियासी हलचल बढ़ा दी है। इस पर जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी सरकार से तीखे सवाल पूछ रही है, वहीं सरकार का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
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इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश के असाफिला और लोंगजू जैसे कई इलाके बेहद संवेदनशील बने हुए हैं,
जिन पर दोनों देश अपना-अपना दावा जताते हैं।
सीमा की लंबाई और भौगोलिक विभाजन:
भारत और चीन के बीच की सीमा को मुख्य रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC कहा जाता है, जो हिमालय पर्वत श्रृंखला के साथ-साथ फैली हुई है:
- सीमा की लंबाई:
- भारत के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस सीमा की कुल लंबाई लगभग 3,488 किलोमीटर है,
- जबकि चीनी पक्ष का अनुमान इससे कम यानी लगभग 2,000 किलोमीटर है।
- विस्तार:
- यह सीमा भारत के एक केंद्र शासित प्रदेश (लद्दाख) और चार राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश) से होकर गुजरती है।
- तीन सेक्टर:
- इस पूरी सीमा को तीन मुख्य हिस्सों (पश्चिमी, मध्य और पूर्वी सेक्टर) में बांटा गया है,
- जिससे दोनों देशों के अलग-अलग दावों को समझने में आसानी होती है।
1. पश्चिमी सेक्टर: लद्दाख और अक्साई चीन
पश्चिमी सेक्टर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और चीन के नियंत्रण वाले शिनजियांग व तिब्बत क्षेत्र के बीच स्थित है।
- अक्साई चीन विवाद:
- इस क्षेत्र का मुख्य विवाद लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर में फैले ‘अक्साई चीन’ को लेकर है।
- भारत इसे अपना अभिन्न अंग मानता है,
- जबकि इस पर चीन का अवैध कब्जा है।
- संवेदनशील इलाके:
- इस सेक्टर में गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो झील, डेपसांग मैदान, गोगरा हॉट स्प्रिंग्स और डेमचोक जैसे इलाके रणनीतिक रूप से सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।

2. मध्य सेक्टर: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड
मध्य सेक्टर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमाओं से जुड़ा हुआ है।
- कम विवादित क्षेत्र: तीनों सेक्टरों में से इसे सबसे कम विवादित और शांत माना जाता है।
- छोटे मतभेद: हालांकि यहां बड़े क्षेत्रीय विवाद नहीं हैं, फिर भी कुछ चुनिंदा जगहों को लेकर मतभेद हैं। उत्तराखंड का ‘बाराहोती’ इलाका और हिमाचल प्रदेश के ‘शिपकी ला दर्रा’, शिवरी व माहेश्वरी जैसे इलाके इसी दायरे में आते हैं।
3. पूर्वी सेक्टर: सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश
पूर्वी सेक्टर के अंतर्गत तिब्बत की सीमा से लगे सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश आते हैं, जिसकी रूपरेखा ‘मैकमोहन लाइन’ पर आधारित है।
- मैकमोहन रेखा: इसे 1914 के शिमला समझौते के तहत तय किया गया था। भारत इसे वैध अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन चीन इसे सिरे से खारिज करता है।
- अरुणाचल प्रदेश पर दावा: चीन लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर में फैले पूरे अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा मानता है और इसे ‘दक्षिण तिब्बत’ कहकर पुकारता है, जबकि भारत इसे अपना अटूट हिस्सा मानता है।
- संवेदनशील पॉकेट्स: इस सेक्टर में असाफिला, लोंगजू और तक्सिंग सर्कल जैसे सीमावर्ती इलाके बेहद संवेदनशील हैं, जहां अक्सर दोनों देशों की सेनाओं का आमना-सामना होता रहता है।
तनाव की असल वजह क्या है?
भारत और चीन के बीच सीमा पर बार-बार होने वाले तनाव का सबसे बड़ा कारण यह है कि जमीन पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को स्पष्ट रूप से चिह्नित नहीं किया गया है। सीमा असल में कहां से गुजरती है, इसे लेकर दोनों देशों की अपनी-अपनी अलग धारणाएं और समझ हैं। यही वजह है कि दोनों पक्षों के गश्ती दल अपनी-अपनी समझ के अनुसार सीमाई इलाकों में आगे बढ़ते हैं, जिससे कई बार टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
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