हेल्थ डेस्क। फेफड़ों का कैंसर (lung cancer) आमतौर पर सिर्फ स्मोकिंग करने वालों से जोड़कर देखा जाता है लेकिन हालिया आंकड़े इस मिथक को पूरी तरह तोड़ते हैं। महिलाओं में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है।
फेफड़ों के कैंसर में ‘पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा’ क्या है?
एडेनोकार्सिनोमा को फेफड़ों के कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार माना जाता है।
- शुरुआत: यह कैंसर शरीर में बलगम (Mucus) बनाने वाली कोशिकाओं से शुरू होता है।
- विकास: यह फेफड़ों के अंदर पनपने के बजाय आमतौर पर उनके बाहरी हिस्सों में विकसित होता है।
- प्रभाव: भले ही इसकी शुरुआत फेफड़ों की बाहरी परत से होती है, लेकिन यह फेफड़े, पेट, पैंक्रियाज और कोलन जैसे अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
बिना स्मोकिंग के भी क्यों होता है यह कैंसर?
यह धारणा गलत है कि फेफड़ों का कैंसर केवल सिगरेट या तंबाकू के सेवन से होता है। ग्लोबोकैन (2024) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के मामले पुरुषों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं।
- शहरी महिलाओं में आंकड़े: शहरों में रहने वाली जो महिलाएं कभी स्मोकिंग नहीं करतीं, उनमें एडेनोकार्सिनोमा के करीब 53% मामले देखे गए हैं।
- प्रमुख शहर: बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में यह आंकड़ा 55% से 59% तक है।
- वार्षिक वृद्धि: सबसे चिंताजनक बात यह है कि धूम्रपान न करने वाली महिलाओं में इस कैंसर की हिस्सेदारी हर साल औसतन 6.7% तक बढ़ रही है।

महिलाओं में इसके मुख्य कारण:
बिना स्मोकिंग के होने वाले इस कैंसर के पीछे कई पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं:
- जहरीली हवा (प्रदूषण): हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व और पीएम कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
- तेल के छोंक का धुआं: किचन में खाना बनाते समय गर्म तेल से उठने वाला धुआं और हानिकारक कण।
- चूल्हे का धुआं: ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लकड़ी या कोयले के चूल्हे से निकलने वाला धुआं।
- पैसिव स्मोकिंग: आसपास के लोगों द्वारा धूम्रपान करने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आना।
- जेनेटिक म्यूटेशन: आनुवंशिक बदलाव या डीएनए म्यूटेशन।
शुरुआती और मुख्य लक्षण:
यदि समय रहते लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है:
- लगातार खांसी रहना
- बेवजह सांस फूलना
- सीने में दर्द महसूस होना
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना
- आवाज में कर्कशता (खुरदुरापन)
- अत्यधिक थकान रहना
- अचानक वजन का घटना
इसका असरदार इलाज क्या है?
- शुरुआती स्टेज: अगर एडेनोकार्सिनोमा का पता पहली स्टेज में चल जाए, तो सर्जरी के माध्यम से फेफड़े के प्रभावित हिस्से को सफलतापूर्वक निकाला जा सकता है।
- एडवांस स्टेज: इस चरण में मरीज की जेनेटिक जांच की जाती है, जिसके आधार पर इम्यूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी दी जाती है।
समय पर जांच और जागरूकता ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी जरिया है।
Tag: #nextindiatimes #lungcancer #health




