डेस्क। धनतेरस का पावन पर्व सुख-समृद्धि, धन और सौभाग्य की कामना के साथ मनाया जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य धातुओं की खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है।
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यह दिन भगवान कुबेर की पूजा का भी खास अवसर होता है। इस दिन बर्तनों की खरीदारी से घर में सौभाग्य और माता लक्ष्मी का वास होता है। इससे जुड़ी एक प्रसिद्ध लोक-मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदा गया बर्तन कभी भी खाली घर नहीं लाना चाहिए।
ज्योतिषी के अनुसार, खाली बर्तन को रिक्तता, अभाव यानी दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है।
आइए जानते हैं इस परंपरा और इसके पीछे के मुख्य कारणों के बारे में विस्तार से:
खाली बर्तन घर न लाने के मुख्य कारण
- पूर्णता का उत्सव:
- दीपावली और धनतेरस का यह पर्व माता लक्ष्मी के स्वागत और जीवन में पूर्णता का प्रतीक है। यही वजह है कि घर की पूर्णता बनाए रखने के लिए खाली बर्तन घर लाने की मनाही होती है।
- अन्न और धन का प्रतीक:
- धनतेरस पर जब भी बर्तन खरीदें, तो उसमें जल, थोड़े से सिक्के, या कम से कम अन्न (जैसे चावल या गेहूं) भरकर घर लाना चाहिए।
- यह इस बात का प्रतीक है कि हमारा घर पूरे साल अन्न और धन से भरा रहे।
- श्री गणेश और बरकत:
- ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार,
- जब हम कोई नया बर्तन खरीदकर उसमें जल या अन्न भरकर घर में प्रवेश करते हैं,
- तो वह घर में श्री गणेश और बरकत का जीवंत प्रतीक बन जाता है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार:
- खाली बर्तन घर न लाने की यह परंपरा हमारे मन में सकारात्मक ऊर्जा और भविष्य के लिए एक अच्छे संकल्प को दर्शाती है। जब बर्तन को किसी सामग्री से पूर्ण करके लाया जाता है, तो यह माता लक्ष्मी का आशीर्वाद लेकर आता है जिससे घर हमेशा धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है।
अगर आप भी धनतेरस (Dhanteras) के दिन नए बर्तनों की खरीदारी कर रहे हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बर्तन को कभी भी खाली हाथ या खाली स्थिति में घर न लाएं।
उसमें पूजा की सामग्री, जल या अन्न अवश्य भर लें।
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