लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। उन्होंने अपनी भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी देने के संकेत दिए हैं।
मायावती ने अपने दोनों भतीजों, आकाश आनंद और ईशान आनंद पर से भरोसा जताना बंद कर दिया है।
इसके बाद अब उन्होंने अपनी भतीजी पर उम्मीद जताई है।
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कौन हैं दीपिका आनंद?
दीपिका आनंद बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं। आनंद कुमार मायावती के छोटे भाई हैं।
वह हमेशा से पार्टी के लिए पर्दे के पीछे रहकर काम करते रहे हैं।
दीपिका की उम्र अभी 22 वर्ष है। वह इस समय लंदन में रहकर वकालत (Law) की पढ़ाई कर रही हैं।
वह अब तक राजनीति से पूरी तरह दूर रही हैं। उन्होंने कभी किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भाग नहीं लिया है।
बसपा में दीपिका आनंद की भूमिका:
मायावती ने सोशल मीडिया ‘X’ पर एक पोस्ट शेयर की। इस पोस्ट में उन्होंने दीपिका आनंद को सक्रिय करने की जानकारी दी।
मायावती ने एक बड़ा और साफ बयान दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आनंद कुमार के बेटों को अब पार्टी में कोई पद नहीं मिलेगा। उन्हें किसी भी तरह की बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखा जाएगा।
हालांकि, पार्टी ने आनंद कुमार को एक छूट दी है। वे अपने काम में मदद के लिए अपनी बेटी दीपिका का सहयोग ले सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर दीपिका अपने पिता के कार्यों में हाथ बटा सकती हैं।
मायावती के अनुसार, दीपिका की कार्यक्षमता और ईमानदारी को देखने के बाद ही उन्हें कोई बड़ा पद दिया जाएगा।

परिवारवाद पर मायावती का रुख:
मायावती ने स्पष्ट किया कि उनके लिए बसपा का मिशन सबसे ऊपर है।
उन्होंने कहा कि पार्टी में पद का आधार केवल परिवार का सदस्य होना नहीं है। संगठन और मिशन के प्रति निष्ठा ही सबसे जरूरी है।
मायावती ने एक और बड़ा विकल्प सामने रखा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि पार्टी का मिशन सबसे पहले आता है।
यदि भविष्य में दीपिका आनंद जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो पार्टी रुकेगी नहीं।
ऐसी स्थिति में पार्टी का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
यह जिम्मेदारी किसी अन्य समर्पित दलित कार्यकर्ता को सौंपी जाएगी।
जो कार्यकर्ता पार्टी के लिए निष्ठा से काम करेगा, उसे ही अवसर मिलेगा।
बहुजन समाज पार्टी के नए नेतृत्व का चुनाव हवा में नहीं होगा। इसका फैसला पूरी तरह से मान्यवर कांशीराम जी के सिद्धांतों पर ही किया जाएगा। पार्टी अपनी मूल विचारधारा और नीतियों से कोई समझौता नहीं करेगी। कांशीराम जी के बताए रास्तों पर चलते हुए ही बसपा के नए नेतृत्व की रूपरेखा तय की जाएगी।
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