GRAP में कितने स्टेज होते हैं, पढ़ें कब लागू होता है कौन सा प्रतिबंध?

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में जैसे ही ठंड का मौसम दस्तक देता है, बढ़ता प्रदूषण और जहरीली हवा एक गंभीर संकट बन जाती है। इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप (GRAP) के नियमों को सख्ती से लागू करता है।

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हवा की गुणवत्ता में लगातार आ रही गिरावट को रोकने और शहरवासियों को साफ हवा उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग चरणों में सख्त पाबंदियां तय की गई हैं।

हवा की सेहत सुधारने की ठोस योजना

दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई (AQI) के स्तर के आधार पर इस पूरी व्यवस्था को चार अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आता है और हर चरण के लिए तय किए गए कड़े नियमों का पालन आम नागरिकों से लेकर सरकारी और निजी संस्थानों के लिए अनिवार्य किया जाता है।

पहला चरण: जब हवा होती है खराब

  • एक्यूआई स्तर:
  • जब हवा का स्तर 201 से 300 के बीच पहुंचता है, तो इसे खराब श्रेणी माना जाता है।
  • मुख्य उपाय:
  • इस शुरुआती दौर में धूल उड़ने वाली जगहों पर पानी का छिड़काव किया जाता है और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल बढ़ाया जाता है। इसके अलावा, प्रदूषण रोकने के लिए होटलों और ढाबों पर कोयले या लकड़ी के तंदूर जलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी जाती है।

दूसरा चरण: बहुत खराब हवा में कड़े कदम

  • एक्यूआई स्तर:
  • हवा का स्तर 301 से 400 तक पहुंचने पर स्थिति बहुत खराब हो जाती है, जिसके तहत ग्रैप का दूसरा चरण एक्टिव किया जाता है।
  • मुख्य उपाय:
  • इस दौरान निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक पार्किंग के दाम बढ़ा दिए जाते हैं ताकि लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें।
  • साथ ही,
  • ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों और नगर निगमों के कामकाज के समय में बदलाव किया जाता है।

तीसरा चरण: गंभीर स्थिति और पाबंदियां

  • एक्यूआई स्तर:
  • AQI के 401 से 450 के बीच पहुंचने पर हवा बेहद गंभीर हो जाती है,
  • जिससे लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगती है।
  • मुख्य उपाय:
  • इस गंभीर स्तर पर पहुंचते ही सभी तरह के निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है ताकि धूल हवा में न घुले।
  • इसके अलावा,
  • सड़कों पर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के चलने पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए जाते हैं।

चौथा चरण: अति गंभीर और आपातकालीन उपाय

  • एक्यूआई स्तर:
  • जब हवा का स्तर 450 का आंकड़ा पार कर जाता है,
  • तो स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगती है और ग्रैप का चौथा व आखिरी चरण लागू किया जाता है।
  • सबसे गंभीर चरण:
  • ग्रैप-4 को सबसे खतरनाक माना जाता है। इस स्थिति में जरूरी सामान ढोने वाले ट्रकों को छोड़कर बाकी सभी कमर्शियल वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाता है। पेट्रोल से चलने वाली बीएस-3 और डीजल पर दौड़ने वाली बीएस-4 गाड़ियों को सड़क पर उतारने की बिल्कुल अनुमति नहीं होती। साथ ही, हालात की नजाकत को देखते हुए दफ्तरों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम और स्कूलों को बंद करने जैसे कड़े फैसले लिए जाते हैं।

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