PMOS से जूझ रही महिलाओं के लिए योग बन सकता है ढाल, रिसर्च में खुलासा

हेल्थ डेस्क। पालीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS), जिसे पहले पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) कहा जाता है, महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाली एक जटिल स्वास्थ्य समस्या है।

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोधकर्ताओं के अनुसार, नियमित योग अभ्यास इस समस्या से जूझ रही महिलाओं के लिए एक प्रभावी ढाल बन सकता है। योग शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और तनाव के नकारात्मक प्रभावों को कम करके आंतों की सेहत को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हार्मोन और मेटाबोलिज्म पर पीएमओएस का असर

पीएमओएस मुख्य रूप से एक हार्मोनल और मेटाबोलिक विकार है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • इंसुलिन प्रतिरोध:
  • शरीर में इंसुलिन का सही इस्तेमाल न होना।
  • एंड्रोजन का स्तर:
  • पुरुष हार्मोन एंड्रोजन के स्तर में वृद्धि।
  • हल्की सूजन:
  • शरीर में लंबे समय तक रहने वाली आंतरिक सूजन।

यह विकार केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हार्मोन, चयापचय और मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए, तो भविष्य में हृदय रोग, फैटी लिवर और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ सकता है।

आंतों के सूक्ष्मजीवों की भूमिका

शोधकर्ताओं के अनुसार, आंतों में मौजूद लाभकारी और अन्य सूक्ष्मजीवों के संतुलन में गड़बड़ी इस सिंड्रोम के विकास में अहम भूमिका निभाती है। आंतों के बैक्टीरिया की विविधता और आंतों की अंदरूनी सुरक्षात्मक परत में बदलाव से शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे:

  • मेटाबोलिज्म बिगड़ता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
  • हार्मोनल नियंत्रण असंतुलित हो जाता है।

आंत और मस्तिष्क का संबंध (गट-ब्रेन एक्सिस)

शोध में आंत-मस्तिष्क अक्ष (गट-ब्रेन एक्सिस) की भूमिका पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है। यह तंत्रिका तंत्र, हार्मोन और प्रतिरक्षा प्रणाली के माध्यम से आंत और मस्तिष्क के बीच दोतरफा संवाद स्थापित करता है।

  • तनाव का प्रभाव:
  • पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं में तनाव के कारण तंत्रिका तंत्र अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे आंतों का रक्त प्रवाह और पाचन स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
  • योग का लाभ:
  • इसके विपरीत, योग ‘पैरासिम्पथेटिक तंत्रिका तंत्र’ को सक्रिय करता है, जो शरीर को आराम देता है और सामान्य पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है। इससे आंतों की सुरक्षात्मक परत मजबूत होती है,
  • सूजन घटती है और लाभकारी बैक्टीरिया के विकास के लिए अनुकूल माहौल बनता है।

योग के तीन प्रमुख अंग और उनके फायदे

शोधपत्र में बताया गया है कि योग के तीन मुख्य घटक—आसन, प्राणायाम और ध्यान—शरीर की तनाव प्रतिक्रिया और हार्मोनल संतुलन को सीधे प्रभावित करते हैं।

पिछले कई अध्ययनों में योग के निम्नलिखित सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:

  • हार्मोनल और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार।
  • इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता का बढ़ना।
  • तनाव हार्मोन और सूजन पैदा करने वाले तत्वों में कमी।
  • ऑक्सीडेटिव तनाव में उल्लेखनीय गिरावट।

एम्स के शरीर रचना विज्ञान विभाग और आणविक प्रजनन प्रयोगशाला की डॉ. रीमा दादा और डॉ. दीपिका कुमारी द्वारा तैयार किया गया यह शोधपत्र ‘इंटरनेशनल जर्नल आफ प्रिवेंटिव मेडिसिन’ में प्रकाशित हुआ है। इसका शीर्षक ‘पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में आंतों के सूक्ष्मजीवों के असंतुलन को सुधारने में योग की संभावित भूमिका’ है।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि योग और आंतों के सूक्ष्मजीवों के आपसी संबंधों को पूरी तरह समझने के लिए अभी और विस्तृत चिकित्सकीय अध्ययनों की आवश्यकता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि तनाव को कम कर पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में योग पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय साबित हो सकता है।

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