डेस्क। बंगाल की खाड़ी में मौसम ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। चक्रवात अर्नब के बाद अब एक नया और खतरनाक मौसमी संकट मंडराने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि समुद्र में बना गहरा दबाव का क्षेत्र जल्द ही एक भीषण चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Murasu) में तब्दील होने वाला है।
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यह तूफान तेजी से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहा है और इसके मंगलवार तक तट से टकराने की पूरी संभावना है। संभावित खतरे को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को पूरी तरह सतर्क रहने और सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
क्या है ‘मुरासु’ नाम का ऐतिहासिक और रोचक इतिहास?
चक्रवात का नाम ‘मुरासु’ भारत द्वारा सुझाया गया है, जिसका सांस्कृतिक और गहरा ऐतिहासिक महत्व है। यह शब्द मूल रूप से तमिल भाषा से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘ढोल’ या एक प्राचीन ताल वाद्य यंत्र होता है।
- ऐतिहासिक संदर्भ:
- प्राचीन काल में राजा-महाराजाओं के शासनकाल के दौरान इस विशेष ढोल का उपयोग आम जनता तक महत्वपूर्ण घोषणाएं पहुंचाने, शाही संदेश देने और किसी भी प्राकृतिक आपदा या संकट के समय लोगों को सचेत करने के लिए किया जाता था।
- नामकरण की वजह:
- लोगों को पहले ही खतरे से आगाह करने वाले इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए इस नए चक्रवाती तूफान का नाम मुरासु रखा गया है।
कितना खतरनाक है मुरासु तूफान?
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस मौसमी सिस्टम के प्रभाव से तटीय क्षेत्रों में लगातार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से हवाएं चलेंगी।
- हवा के झोंके:
- तूफान के आगे बढ़ने के दौरान हवा के झोंकों की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
- तुलनात्मक राहत:
- राहत की बात यह है कि मुरासु की गति पिछले चक्रवात ‘अर्नब’ जितनी भयावह नहीं होगी, क्योंकि अर्नब ने लगभग 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंध्र प्रदेश में भारी तबाही मचाई थी।
- हालांकि,
- इसके बावजूद इसे कमजोर समझने की भूल नहीं की जा सकती।
भारी बारिश और विनाशकारी रूप
भले ही हवा की रफ्तार के मामले में मुरासु पिछले तूफान से थोड़ा कम शक्तिशाली हो,
लेकिन इसका असली खतरा मूसलाधार बारिश से जुड़ा है।
- अत्यधिक वर्षा:
- इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के कई हिस्सों में 200 से 300 मिलीमीटर तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है।
- संभावित नुकसान:
- इतनी भीषण वर्षा के कारण निचले इलाकों में भयंकर बाढ़ आने, सड़कों पर जलभराव होने और सामान्य जनजीवन के पूरी तरह अस्त-व्यस्त होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
प्रभावित होने वाले राज्य और मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने खतरे को भांपते हुए कई राज्यों के लिए विस्तृत चेतावनी जारी की है:
- तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा:
- अगले दो से तीन दिनों तक मध्यम से भारी बारिश की प्रबल संभावना है।
- संवेदनशील जिले:
- लैंडफॉल (तट से टकराने की प्रक्रिया) के दौरान आंध्र प्रदेश के कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों में स्थिति सबसे अधिक संवेदनशील रहेगी, जिसके चलते प्रशासन ने यहां रेड अलर्ट जारी कर दिया है।
- अन्य दक्षिणी राज्य:
- तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे के तटीय क्षेत्रों में भी मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया गया है।
- समुद्र की स्थिति:
- इस दौरान समुद्र बेहद उग्र रहेगा और ऊंची लहरें उठेंगी, इसलिए मछुआरों को पूरी तरह से समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
- अन्य राज्यों पर असर:
- तटीय इलाकों को पार करने के बाद यह चक्रवात तेलंगाना और दक्षिणी ओडिशा की ओर रुख करेगा।
- इसके साथ ही,
- इस मौसमी बदलाव का असर उत्तर भारत के कुछ हिस्सों पर भी पड़ेगा,
- जिससे उत्तर प्रदेश,
- बिहार और झारखंड के मौसम में बदलाव आएगा और वहां रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है।
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