सेंधा नमक हड्डियों को अंदर से कर देगा खोखला, कभी न करें ये गलती

हेल्थ डेस्क। आज के समय में इंटरनेट मीडिया पर फिटनेस (health), प्रोटीन और मसल्स बिल्डिंग का क्रेज तेज़ी से बढ़ रहा है। लोग आकर्षक बॉडी बनाने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं। इसके विपरीत, देश में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो कमजोर हड्डियों के कारण हर समय फ्रैक्चर के गंभीर जोखिम के साथ जीने को मजबूर है।

यह भी पढ़ें-गेहूं की नहीं; इस आटे की रोटी खाएं डायबिटीज के मरीज, कंट्रोल रहेगा शुगर

मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, हड्डियों के कमज़ोर होने या आसानी से टूटने के पीछे सबसे बड़ा कारण शरीर में सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) की भारी कमी होना है।

कमजोर हड्डियों और आयोडीन का गहरा रिश्ता:

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और जाने-माने एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ भारत में कमज़ोर हड्डियों की समस्या के पीछे आयोडीन की कमी को भी एक मुख्य वजह मानते हैं। देश में विटामिन-D और कैल्शियम की कमी तो पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई थी, लेकिन अब आयोडीन की कमी इस संकट को और गंभीर बना रही है।

एक अनुमान के मुताबिक, भारत में 20 करोड़ से अधिक लोग आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों के खतरे की चपेट में हैं। रिपोर्ट बताती है कि देश का कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश इस समस्या से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन नहीं मिलता, तो थायरॉइड ग्रंथि को अपना काम करने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

इससे धीरे-धीरे थायरॉइड का आकार बढ़ने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में घेंघा या गाइटर (Goitre) कहा जाता है। आयोडीन की भारी कमी से बच्चों में दिमाग का विकास बुरी तरह प्रभावित होता है, और गर्भावस्था के दौरान इसका जोखिम सबसे अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।

थायरॉइड असंतुलन के गंभीर परिणाम:

आयोडीन की कमी से ‘हाइपोथायरायडिज्म’ की समस्या होती है, जो हड्डियों के नए निर्माण को बाधित कर देती है। वहीं, इसके विपरीत आयोडीन की अधिकता या हॉर्मोनल असंतुलन यानी ‘हाइपरथायरायडिज्म’ हड्डियों के क्षरण यानी टूटने की प्रक्रिया को तेज कर देता है।

  • शारीरिक लक्षण: थायरॉइड असंतुलन के कारण मेटाबोलिज्म और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। बेसल मेटाबोलिक रेट कम होने से शरीर का वजन तेजी से बढ़ने लगता है।
  • प्रमुख परेशानियां: वजन बढ़ने के साथ-साथ भूख कम लगना, शरीर में सूजन रहना, लगातार थकान और सुस्ती महसूस होना,
  • सुबह उठने पर फ्रेश महसूस न होना इसके आम लक्षण हैं।
  • ऐसे लोगों को ठंड अधिक लगती है और पाचन से जुड़ी दिक्कतें बनी रहती हैं।
  • कुछ मामलों में बाल झड़ना और त्वचा में सूखापन जैसी परेशानियां भी सामने आती हैं।

शारीरिक और मानसिक विकास के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन?

मानव शरीर खुद आयोडीन का निर्माण नहीं कर सकता है। इसे प्राप्त करने का एकमात्र मुख्य साधन हमारा भोजन ही है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए, क्योंकि इसके असंतुलन से शरीर पर कई बुरे असर पड़ते हैं।

यदि गर्भस्थ शिशु में आयोडीन की कमी हो जाए या पर्याप्त थायरॉइड हॉर्मोन न बने, तो बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास रुक सकता है। आयोडीन की कमी के कारण कई बार गर्भपात (Miscarriage) होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

मेटाबोलिज्म प्रभावित होने से हड्डियों की बोन मिनरल डेंसिटी कम हो जाती है,

जिससे मामूली चोट पर भी फ्रैक्चर की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

इसके अलावा,

थायरॉइड मरीजों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी असंतुलित हो जाता है।

आयोडीन की कमी दूर करने के प्रमुख स्रोत:

शरीर में आयोडीन के संतुलन को बनाए रखने के लिए अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है:

  • सीफूड्स:
  • समुद्री शैवाल (सीवीड), झींगा (श्रिंप) और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों में आयोडीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • दुग्ध उत्पाद:
  • दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों से भी शरीर को आवश्यक मात्रा में आयोडीन मिल जाता है।
  • आयोडीन युक्त नमक:
  • बाजार में मिलने वाले सामान्य नमक की बजाय हमेशा अच्छी क्वालिटी के आयोडाइज्ड नमक का ही उपयोग करें।
  • खाना पकाते या खाते समय इस बात का ध्यान रखें कि नमक संतुलित मात्रा में ही लिया जाए।

Tag: #nextindiatimes #health #lifestyle

RELATED ARTICLE