लखनऊ। 13 साल की लंबी प्रशासनिक सेवा के बाद पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल (Divya Mittal) ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में आधिकारिक तौर पर कदम रख दिया है। करीब एक महीने पहले प्रशासनिक पद से इस्तीफा देने वाली 2013 बैच की पूर्व अधिकारी ने अब अपनी आगे की रणनीति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय स्वतंत्र रूप से एक नया रास्ता चुनेंगी।
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उत्तर प्रदेश से स्वतंत्र राजनीतिक पारी का आगाज:
दिव्या मित्तल ने अपने ताजा वीडियो संदेश में बताया कि उत्तर प्रदेश सिर्फ उनकी कार्यभूमि नहीं, बल्कि परिवार की तरह है। इसी वजह से वह अपनी नई पारी की शुरुआत यूपी से ही कर रही हैं। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा बटोर रहा है। किसी पारंपरिक पार्टी का सिंबल लेने के बजाय वह आम जनता को अपने साथ जोड़कर नया राजनीतिक मॉडल पेश करने की तैयारी में हैं।
जनसंवाद और डिजिटल रणनीति पर जोर:
दिव्या मित्तल ने सीधे संवाद के लिए अपना व्हाट्सएप नंबर (9198956957) साझा किया है।
उन्होंने नागरिकों से इस नंबर पर संदेश भेजकर साथ जुड़ने की अपील की है।
उनका स्पष्ट मानना है कि वास्तविक बदलाव किसी एक नेता से नहीं,
बल्कि आम लोगों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
प्रशासनिक अनुभव और जनता के मुद्दे:
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ीं दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के दौरान मिर्जापुर, संत कबीरनगर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में काम किया है। मिर्जापुर के पथरीले गांव लहुरियादह में पाइप से पानी पहुंचाने की उनकी पहल काफी चर्चित रही थी। इसके अलावा वह मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्ध नगर में सीडीओ रही। कानपुर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक और बरेली विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर भी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।
प्रशासनिक करियर में जमीनी समस्याओं को बहुत करीब से देखने के बाद उन्होंने अब राजनीति को ही जनसेवा का नया जरिया बनाने का फैसला किया है।
हालांकि उनके नए संगठन का ढांचा और चुनावी रणनीति क्या होगी,
इसका पूरा खाका आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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