लालबागचा राजा की पहली स्थापना कब और किसने की थी, दिलचस्प है कहानी

डेस्क। भारत भर में गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। देश के सबसे मशहूर गणेश पंडालों में से एक ‘लालबागचा राजा’ (Lalbaugcha Raja) है। इसकी स्थापना की कहानी मुंबई के मजदूरों और मछुआरों के संघर्ष से जुड़ी है।

यह भी पढ़ें-डेढ़, 5 या 10 दिन…कितने दिन गणपति रखने की है सही परंपरा, जान लें नियम

बाजार बंद होने से आया आर्थिक संकट:

1930 के दशक में मुंबई का लालबाग इलाका कपड़ा मिलों और मजदूरों का बड़ा केंद्र था। वर्ष 1932 में आर्थिक मंदी और बदलावों के कारण पेरू चाल का पुराना बाजार अचानक बंद हो गया।

इससे वहां व्यापार करने वाले कोली मछुआरों और छोटे दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया।

बप्पा से मांगी गई मन्नत:

मुश्किल समय में बेघर हुए व्यापारियों और मछुआरों ने भगवान गणेश से मन्नत मांगी। उन्होंने प्रार्थना की कि व्यापार के लिए पक्की जगह मिलते ही वे गणेश उत्सव मनाएंगे और बप्पा की मूर्ति स्थापित करेंगे।

जमीन मिलने पर पूरी हुई मन्नत:

स्थानीय नेताओं और निवासियों की कोशिशों के बाद जमीन मालिक रजाबाई तैयबअली ने बाजार के लिए अपनी जमीन देने पर सहमति जताई।

पक्की जगह मिलते ही 12 सितंबर 1934 को पहली बार बप्पा की मूर्ति स्थापित की गई।

इस आयोजन में कुंवर जी जेठाभाई शाह, श्यामराव विष्णु बोधे, रामचंद्र तावड़े, वी.बी. कोरगांवकर और नखावा कोकम मामा जैसे स्थानीय लोगों ने मुख्य भूमिका निभाई।

पहली मूर्ति का रूप और कांबली परिवार :

लालबागचा राजा की पहली मूर्ति मिट्टी से बनी एक छोटी प्रतिमा थी। इसे कोली समुदाय के पारंपरिक पहनावे (धोती और टोपी) से सजाया गया था। वर्ष 1935 में मूर्ति बनाने की जिम्मेदारी मधुसूदन कांबली ने संभाली।

तब से कांबली परिवार ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी लालबागचा राजा की भव्य मूर्ति बना रहा है।

कैसा है इस बार बप्पा का शाही दरबार?

इस साल बप्पा को एक शानदार मंदिर की थीम वाले पंडाल में विराजमान किया गया है।

पंडाल की नक्काशी और बारीकी देखने लायक है।

इसकी सबसे खास बात यह है कि इस पर चांदी की परत चढ़ाई गई है।

इससे पूरा दरबार शाही महल की तरह जगमगा रहा है।

Tag: #nextindiatimes #LalbaugchaRaja #ganeshchaturthi2026

RELATED ARTICLE