पटना। बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। दरअसल नीट परीक्षा लीक मामले को लेकर किए गए बिहार बंद के दौरान भड़की जबरदस्त हिंसा के सिलसिले में लालू यादव के बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान इलाके में छात्रों के उग्र प्रदर्शन को उकसाने और सुरक्षा बलों पर पथराव की साजिश रचने के संगीन आरोपों के तहत यह पूरी कानूनी कार्रवाई अंजाम दी गई है।
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Tej Pratap Yadav पर लगाई गई सबसे सख्त कानूनी धारा बीएनएस की 109 है, जो कि सीधे तौर पर हत्या के प्रयास से संबंधित मानी जाती है। यह कानूनी प्रावधान तब लागू किया जाता है, जब कोई शख्स इरादतन ऐसा काम करे, जिससे किसी की जान को सीधा खतरा पैदा हो। अगर अदालत में यह आरोप सिद्ध हो जाता है तो तेज प्रताप यादव को कम से कम 10 साल तक की सख्त कैद और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। वहीं अगर किसी पीड़ित को गंभीर चोट पहुंचाना भी साबित हो गया, तब तो सजा उम्रकैद में तब्दील हो सकती है।

प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर हमला करने के आरोप में बीएनएस की धारा 132 के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, ऑन-ड्यूटी पुलिस ऑफिसर को सीधे तौर पर शारीरिक नुकसान पहुंचाने और घायल करने के एवज में धारा 297 लगाई गई है। इन धाराओं के जुड़ने से तेज प्रताप की न्यायिक हिरासत की अवधि लंबी होना तय माना जा रहा है।
प्रशासनिक पाबंदियों के बाद भी भीड़ इकट्ठा करने पर धारा 197(2) और गैरकानूनी जमावड़े के साझा उद्देश्य के लिए धारा 190 लगाई गई है। इसके अलावा घातर हथियारों के साथ उग्र दंगा फैलाने के संगीन आरोप में धारा 251 और धारा 191(3) को शामिल किया गया है।
हिंसी की पूरी पटकथा तैयार करने के मामले में तेज प्रताप पर आपराधिक षडयंत्र रचने की धारा 61(2) लगाई गई है। साथ ही किसी गंभीर अपराध को अंजाम देने के लिए लोगों को दुष्प्रेरित या फिर उकसाने के जुर्म में बीएनएस की धारा 49 जोड़ी गई है। जांच अधिकारियों का तर्क है कि नेता ने मंच से दिए बयानों के जरिए युवाओं के गुस्से को भड़काया और उन्हें पुलिस पर सीधा पथराव करने के लिए प्रेरित किया।
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