लाइफस्टाइल डेस्क। infertility आज एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिससे दुनियाभर में लाखों लोग जूझ रहे हैं। इनफर्टिलिटी की समस्या तब होती है, जब कोई कपल एक साल से कंसीव करने की कोशिश करे, लेकिन प्रेग्नेंसी न हो पाए या महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा होने पर कोशिश करने के बावजूद 6 महीने तक कंसीव न कर पाना।
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आमतौर पर हम इनफर्टिलिटी से जुड़े आम कारणों पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार इसके पीछे कुछ छिपी हुई वजहें हो सकती हैं, जिनकी पहचान करके सही इलाज करवाया जा सकता है। अगर आप इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो घबराएं नहीं। बिना देर किए फर्टिलिटी एक्सपर्ट से संपर्क करें। सही इलाज से माता-पिता बनने का सपना पूरा हो सकता है।
-कई बार हार्मोन्स से जुड़ी समस्याएं बिना किसी लक्षण के फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं, जैसे- थायरॉइड डिसऑर्डर या पीसीओएस। थॉयरॉइड ग्लैंड का जरूरत से ज्यादा या कम एक्टिव होना, महिलाओं में ओव्यूलेशन और पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित करता है।
-कपल्स में इनफर्टिलिटी के पीछे पुरुषों से जुड़े कारण भी हो सकते हैं। स्पर्म काउंट कम होना, स्पर्म मोटिलिटी कम होना, स्पर्म का आकार सही न होना या फिर वेरीकोसेल जैसे कारण बिना जांच के सामने नहीं आते। इसलिए इनफर्टिलिटी के मामलों में सिर्फ महिलाओं की जांच करवाना काफी नहीं है।

-रोजमर्रा की आदतों का भी फर्टिलिटी पर गहरा असर पड़ता है। स्मोकिंग, शराब पीना, नशा करना, लगातार स्ट्रेस में रहना, नींद की कमी और एक्सरसाइज न करने जैसी आदतें भी फर्टिलिटी कम करती हैं। इसके अलावा, पेस्टिसाइड्स, हैवी मेटल्स, टॉक्सिक पार्टिकल्स और ज्यादा गर्मी की वजह से भी फर्टिलिटी प्रभावित होती है।
-महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस, किसी इन्फेक्शन के कारण फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होना या ओवेरियन रिजर्व कम होना ऐसे कारण हैं, जिनके कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन इनके कारण फर्टिलिटी कम हो सकती है। इसके अलावा, एसटीआई का इलाज न करवाना भी फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या का कारण बन सकता है।
-साथ ही, बढ़ती उम्र भी एक बड़ा फैक्टर है। 35 की उम्र के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी तेजी से घटती है, वहीं पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म क्वालिटी कम होने और जेनेटिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
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