सिद्धार्थनगर। जिले के बांसी नगर पालिका क्षेत्र से सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी निर्माण/परिसर (government premises) में बिना पुलिस सत्यापन के रह रहे अज्ञात लोगों को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला सिर्फ नियम-कायदे के उल्लंघन का नहीं, बल्कि सुरक्षा में सेंध और एक विवादित कार्यप्रणाली वाली फर्म की भूमिका से भी जुड़ा है।
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बांसी नगर पालिका परिसर में रह रहे कुछ संदिग्ध लोगों को लेकर स्थानीय सजग नागरिकों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना किसी गहन पुलिस वेरिफिकेशन के ठहरे ये लोग अवैध रूप से रह रहे बाहरी नागरिक हो सकते हैं।
जब इस पूरे मामले पर बांसी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कैमरे के सामने स्वीकार किया कि ये लोग ‘चमन कंस्ट्रक्शन’ के जरिए नालों की सफाई के लिए लाए गए अस्थाई मजदूर हैं, जिन्हें अध्यक्ष के निर्देश पर वहां ठहराया गया है।

इतना ही नहीं, सफाई का ठेका लेने वाली फर्म ‘चमन एजेंसी’ का ट्रैक रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में रहा है। सूत्रों की मानें तो पूर्व में भी इस फर्म पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। ऐसे में बिना सत्यापन के बाहरी और संदिग्ध लोगों को सरकारी आश्रय देना प्रशासनिक लापरवाही है या किसी बड़े मामले को अनदेखा करने की कोशिश?
सरकारी नियम साफ कहते हैं कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को काम पर रखने या ठहराने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है लेकिन बांसी में नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह बिना सत्यापन के लोगों को सरकारी परिसर में रखा गया, वह स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कड़ा रुख अपनाता है?
(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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