डेस्क। राम मंदिर दान चोरी मामले में पिछले कुछ दिनों लगातार बड़ी कार्रवाइयां चल रही हैं। दो दिन पहले राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया और कई धाराओं में एफआईआर का होना दर्शाता है कि श्रद्धालुओं की आस्था पर जो गहरी चोट पहुंचाई गई है, उसके आरोपी बख्शे नहीं जाएंगे। ऐसे में लोगों के मन में यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर समाज और भगवान के नाम पर बनने वाले इन ट्रस्टों का सच आखिर क्या है? ये कितनी तरह के होते हैं और कैसे काम करते हैं?
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कानून की नजर में ट्रस्ट (trust) एक ऐसी मजबूत संस्था होती है, जिसमें कोई व्यक्ति संस्था या समाज अपने कल्याण या फिर अपने परिवार के हित के लिए धन-संपत्ति को किसी दूसरे जिम्मेदार शख्स को सौंपी जाती है। भारत में मुख्य रूप से दो तरह के ट्रस्ट बनाए जाते हैं, जिसको हम पब्लिक ट्रस्ट और प्राइवेट ट्रस्ट के नाम से जानते हैं। पब्लिक ट्रस्ट को आम बोलचाल की भाषा में चैरिटेबल ट्रस्ट भी कहा जाता है, जिसका पूरा मकसद समाज सेवा, गरीब बच्चों की पढ़ाई, अस्पताल चलाना या किसी धार्मिक स्थल की देखरेख करना होता है।

दूसरी तरफ, प्राइवेट ट्रस्ट किसी खास परिवार या फिर कुछ गिने-चुने लोगों के निजी फायदे और उनकी पारिवारिक संपत्ति के सही प्रबंधन के लिए बनाया जाता है, जिससे आम जनता को कोई मतलब नहीं होता है। किसी भी ट्रस्ट को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदारी मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण किरदारों के कंधों पर टिकी होती है, जिनके बिना यह सिस्टम आगे नहीं बढ़ सकता है। इसमें सबसे बड़ा नाम सेटलर का होता है, जिसे हम ट्रस्ट का निर्माता या मुख्य दानदाता भी कहते हैं, जो अपनी मर्जी से अपनी संपत्ति या फिर फंड ट्रस्ट को शुरू करने के लिए दान करता है।
अगर कोई व्यक्ति समाज सेवा या फिर किसी नेक काम के लिए नया ट्रस्ट बनाना चाहता है, तो उसको एक तय कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होता है। सबसे पहले तो ट्रस्ट का कोई एकदम नया और अनोखा नाम सोचना होता है, जो कि पहले से किसी संस्था ने न रखा हो, साथ ही उसका उद्देश्य भी लिखना होता है।
इसके बाद सबसे जरूरी दस्तावेज तैयार किए जाते हैं, जिसे ट्रस्ट डीड कहते हैं। इस डीड में ट्रस्ट को चलाने के लिए सारे कड़े नियम, ट्रस्टियों के अधिकार और पैसे के खर्च से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी बात साफ तौर पर लिखी जाती है। इस पूरे मसौदे को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार तय कीमत वाले नॉन-जुडिशियल स्टैंप पेपर पर अच्छे से प्रिंट कराया जाता है।
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