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शुक्रवार, जून 26, 2026

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बनने से पहले क्या करते थे चंपत राय? पढ़ें उनका पूरा सफर

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही राम मंदिर आंदोलन के साथ चंपत राय के लंबे जुड़ाव और उस सफर पर फिर से ध्यान गया है जिस वजह से वे ट्रस्ट के सबसे जरूरी पदाधिकारियों में से एक बने। 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालने से पहले चंपत राय क्या करते थे इस सवाल ने लोगों का ध्यान खींचा है।

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चंपत राय ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर में आरएसएम डिग्री कॉलेज में केमेस्ट्री प्रोफेसर के तौर पर की थी। उन्होंने टीचर के तौर पर काम किया और बाद में अपना जीवन सामाजिक और संगठनात्मक कामों के लिए समर्पित कर दिया। उनके एकेडमिक बैकग्राउंड को अक्सर इस बात के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है कि कैसे उन्होंने एजुकेशन के क्षेत्र से निकलकर फुल टाइम सार्वजनिक जीवन को अपनाया।

1975 में लगी इमरजेंसी के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने की वजह से चंपत राय को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें सीधे कॉलेज से ही कस्टडी में ले लिया गया था और बताया जाता है कि उन्होंने लगभग 18 महीने जेल में बिताए थे। जेल की सजा उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ साबित हुई और यहीं से उन्होंने अपने टीचिंग करियर को छोड़ने का फैसला किया।

नौकरी छोड़ बने राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रचारक:

जेल से रिहा होने के बाद चंपत राय ने सरकारी टीचिंग की नौकरी छोड़ दी और फुल टाइम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रचारक बन गए। आने वाले सालों में उन्होंने संघ द्वारा दी गई जिम्मेदारियों को बड़े पैमाने पर संभाला। उनके काम की वजह से ही वे 1991 में अयोध्या पहुंचे और उन्होंने अवध क्षेत्र का क्षेत्रीय संगठन मंत्री का पद संभाला।

विश्व हिंदू परिषद में चंपत राय ने कई सालों तक कई बड़े पदों पर काम किया। उन्होंने केंद्रीय सचिव, संयुक्त महासचिव, अंतर्राष्ट्रीय महासचिव और बाद में संगठन के उपाध्यक्ष के रूप में सेवा दी। विश्व हिंदू परिषद में उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव ने एक असरदार ऑर्गेनाइजर और रणनीतिकार के तौर पर उनकी पहचान को और भी मजबूत किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन में लड़ी अहम लड़ाई:

चंपत राय कई दशकों से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहने के लिए जाने जाते हैं। राम मंदिर विवाद पर कानूनी लड़ाई के दौरान उन्होंने एतिहासिक रिकॉर्ड, दस्तावेजी सबूत और दूसरी ऐसी चीजों को इकट्ठा किया जिनका इस्तेमाल अदालत में हिंदू पक्ष की तरफ से वकीलों ने किया था।

अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 2020 में राम मंदिर के निर्माण और मैनेजमेंट की देखरेख के लिए 15 सदस्यों की श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। चंपत राय को ट्रस्ट का जनरल सेक्रेटरी इसी वजह से बनाया गया था क्योंकि वे दशकों से इस आंदोलन से जुड़े हुए थे। इसी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद में उनका प्रशासनिक अनुभव था और मंदिर अभियान से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और संगठनात्मक प्रयासों में तालमेल बैठाने में भी उनके बड़ी भूमिका थी।

Tag: #nextindiatimes #ChampatRai #RamMandir #Ayodhya

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