मुंबई। पीएम मोदी इस वक्त पांच देशों नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड, यूएई और इटली के दौरे पर हैं। इस यात्रा के आखिरी पड़ाव में वह इटली की राजधानी रोम पहुंच चुके हैं, जहां उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की मशहूर ‘Parle Melody’ चॉकलेट का पैकेट गिफ्ट किया। आइए जानते हैं कि पार्ले की मशहूर मेलोडी चॉकलेट कब बनी थी?
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बता दें कि ‘मेलोडी’ को भारत की सबसे पुरानी और जानी-मानी कंपनी Parle Products (पारले) ने बनाया है। पारले कंपनी ने इसे करीब 41 साल पहले यानी साल 1983 में लॉन्च किया था। 1980 और 90 के दशक में मेलोडी ने भारतीय बाजार में कदम रखा और देखते ही देखते यह बच्चों से लेकर बड़ों तक की पहली पसंद बन गई। इस टॉफी की खासियत इसके बाहर मौजूद कैरेमल (Caramel) की एक मीठी परत होती है और अंदर चॉकलेटी क्रीम भरी होती है।

यही अनोखा स्वाद इसे बाकी टॉफियों से अलग बनाता है। एक वक्त था, जब यह टॉफी सिर्फ 50 पैसे में मिला करती थी। महंगाई बढ़ने के बावजूद आज भी यह भारत की लगभग हर छोटी-बड़ी दुकान पर महज एक रुपये में आसानी से मिल जाती है। जिस कंपनी ने मेलोडी जैसी आइकॉनिक टॉफी बनाई, उसका इतिहास भी बेहद शानदार है। पारले कंपनी की शुरुआत साल 1929 में हुई थी। इसे मुंबई के विले पार्ले इलाके में चौहान परिवार (मोहनलाल चौहान) ने शुरू किया था।
शुरुआत में यह कंपनी सिर्फ 12 लोगों के साथ बेकरी का काम करती थी और ब्रेड-बन आदि बनाती थी। 1939 में कंपनी ने बिस्कुट बनाना शुरू किया, जिसमें ‘Parle-G’ (पारले-जी) सबसे ज्यादा मशहूर हुआ। आगे चलकर 1983 में मेलोडी और 1989 में ‘मैंगो बाइट’ जैसी कैंडी बाजार में उतारी गईं। सिर्फ 60 हजार रुपये से शुरू हुई यह कंपनी आज 45 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की वैल्यू वाली कंपनी बन चुकी है।
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