डेस्क। देश में जब भी किसी इलाके में हिंसा, दंगा, तनाव, विरोध प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था बिगड़ने जैसे हाला होते हैं, तो अक्सर दो शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में आ जाते हैं। यह दो शब्द धारा 144 और कर्फ्यू है। कई लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन असल में दोनों अलग-अलग प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्थाएं हैं। आम लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इन दोनों में फर्क क्या होता है और सरकार इन्हें कब लागू करती है?
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धारा 144 भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) का एक कानूनी प्रावधान है। इसे जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या किसी अधिकृत अधिकारी के तहत लागू किया जाता है।इसका उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे, हिंसा, दंगे या अशांति को पहले ही रोकना होता है। जब प्रशासन को लगता है कि किसी इलाके में भीड़ जमा होने से माहौल खराब हो सकता है, तब धारा 144 लागू कर दी जाती है।
इसके तहत एक जगह पर चार या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी जाती है। इसमें चार या उससे ज्यादा लोगों के जमा होने पर रोक रहती है। जुलूस, प्रदर्शन और रैलियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। हथियार, लाठी-डंडा या खतरनाक सामान लेकर चलना मना होता है। सोशल मीडिया या भाषणों के जरिए भड़काऊ बातें फैलाने पर कार्रवाई हो सकती है। यह आमतौर पर दो महीने तक लागू रहती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर बढ़ाई भी जा सकती है। लोग जरूरी कामों के लिए आ-जा सकते हैं।

Curfew धारा 144 से ज्यादा सख्त व्यवस्था होती है। जब किसी इलाके में हालात बहुत ज्यादा खराब हो जाते हैं और हिंसा या दंगे फैलने का खतरा गंभीर हो जाता है, तब प्रशासन कर्फ्यू लागू करता है। कर्फ्यू के दौरान लोगों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है। बाजार, स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और सार्वजनिक जगहें बंद कर दी जाती हैं। सिर्फ जरूरी सेवाओं जैसे अस्पताल, एम्बुलेंस और दवा दुकानों को ही छूट मिलती है। कर्फ्यू में लोगों के घर से बाहर निकलने पर रोक रहती है।
धारा 144 और कर्फ्यू दोनों का उद्देश्य शांति बनाए रखना होता है, लेकिन दोनों की सख्ती अलग होती है। धारा 144 में भीड़ जमा होने पर रोक लगाती है। लोग जरूरी काम से बाहर जा सकते हैं। यह एक कानूनी प्रावधान है और स्थिति को बिगड़ने से पहले कंट्रोल करने के लिए लागू होती है। वहीं कर्फ्यू में लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाता है। बिना अनुमति घर से बाहर निकलना मना होता है। यह प्रशासनिक कार्रवाई होती है और गंभीर हिंसा या दंगे की स्थिति में लगाया जाता है। धारा 144 चेतावनी और रोकथाम का कदम है, जबकि कर्फ्यू पूरी तरह सख्त कंट्रोल की स्थिति होती है।
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