हेल्थ डेस्क। रात में अगर सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, छाती में जकड़न, गले से सीटी जैसी आवाज आने जैसी समस्या होती है, तो इस मौसम में थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। Asthma एक आनुवंशिक रोग है जिसमें रोगी की सांस की नलियां अतिसंवेदनशील होती है और कुछ कारकों के प्रभाव से उनमें सूजन आ जाती है। इससे रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है।
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अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट और खांसी का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए धूम्रपान, धूल-मिट्टी, पालतू जानवरों के बाल, पराग कण, ठंडी हवा, तेज गंध वाले परफ्यूम और प्रोसेस्ड फूड से तुरंत दूरी बना लें। घर में नमी और फफूंद को न पनपने दें, इनहेलर हमेशा साथ रखें और गर्म पेय पदार्थ पिएं।

बदलते मौसम और घटते-बढ़ते तापमान की स्थिति में विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।हमेशा दवा अपने पास रखनी चाहिए और कंट्रोलर इन्हेलर हमेशा समय लेते रहना चाहिए। सिगरेट, बीड़ी के धुएं और अन्य एलर्जन से बचना चाहिए। अपने फेफड़े को मजबूत बनाने के लिए सांस का व्यायाम यानी प्राणायाम बहुत लाभकारी। यदि बलगम गाढ़ा हो गया है, खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाए या रिलीवर इन्हेलर की जरूरत बढ़ जाए, तो तुरंत चिकित्सक से मिलना चाहिए।
रोगी एसी या कूलर के कमरे से एकदम गर्म हवा में बाहर न जायें। यात्रा के दौरान बच्चों को लेकर वाहन की खिड़की के पास न बैठें। बिना डाक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। धुआं, धूल, मिट्टी वाली जगह से बिना नाक मुंह ढंके न गुजरें। अस्थमा रोगी इत्र, परफ्यूम का इस्तेमाल न करें। घर में जानवरों को न पालें तथा घर में धूल को न जमने दें।
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