डेस्क। क्या आपने कभी सोचा है कि LPG गैस की यह मात्रा 14 या 15 किलो के राउंड फिगर में न होकर ठीक 14.2 किलो ही क्यों होती है? 14.2 किलो का यह आंकड़ा कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे दशकों पुराना सर्वे, इंजीनियरिंग का दिमाग और आम आदमी की सुविधा का एक गहरा विज्ञान छिपा हुआ है।
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दशकों पहले जब भारत में गैस सिलेंडर की शुरुआत हो रही थी, तब बर्मा शेल (Burmah Shell) नामक कंपनी ने एक सर्वे किया था। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि एक औसत व्यक्ति बिना किसी मशीन के कितना वजन आसानी से उठा सकता है। सिलेंडर का खाली वजन और उसमें भरी जाने वाली गैस को मिलाकर कुल वजन लगभग 29.5 से 30 किलो के आसपास बैठता है।

विशेषज्ञों ने पाया कि यदि गैस की मात्रा 15 किलो या उससे ज्यादा कर दी जाती, तो सिलेंडर का कुल वजन 35 किलो के पार चला जाता, जिसे घर की सीढ़ियों पर चढ़ाना या एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी चुनौतीपूर्ण होता। यह गैस बेहद ज्वलनशील होती है और यह तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील है। गर्मी बढ़ने पर गैस के फैलने की प्रवृत्ति होती है, जिससे सिलेंडर के अंदर का दबाव बढ़ जाता है।
सुरक्षा मानकों के अनुसार, सिलेंडर के भीतर हेडस्पेस यानी खाली जगह छोड़ना अनिवार्य है, ताकि गैस को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। 14.2 किलो की मात्रा वह सबसे सटीक पैमाना है, जिसमें गैस का दबाव सुरक्षित स्तर पर बना रहता है। इससे ज्यादा गैस भरने पर सिलेंडर के फटने या लीक होने का जोखिम बढ़ सकता था, जिसे ध्यान में रखते हुए इस जादुई नंबर को फ्रीज कर दिया गया।
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