नई दिल्ली। भारत में चुनाव किसी उत्सव से कम नहीं होते, लेकिन इस उत्सव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता का कवच तैयार करता है। हम आपको बताएंगे कि चुनावी आचार संहिता को कब और क्यों लागू किया जाता है?
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आचार संहिता में नियम होते हैं जिनका पालन चुनाव के समय करना आवश्यक होता है। आचार संहिता (Code of Conduct) लागू होने के बाद जाति, धर्म, भाषा या समुदायों के बीच मतभेद बढ़ाने वाली कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए। दूसरे दलों की आलोचना केवल नीतियों, कार्यक्रम, पिछले रिकॉर्ड पर होनी चाहिए। निजी जीवन, परिवार या बिना सबूत आरोप न लगाएं। धर्म या जाति के नाम पर वोट मांगना मना है। इसके अलावा धार्मिक स्थलों का प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते।

इसके लागू होने के बाद चुनाव से जुड़े अधिकारियों का स्थानांतरण पूरी तरह प्रतिबंधित होता है, इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी है। मंत्री चुनाव अधिकारी को बिना वजह नहीं बुला सकते।आचार संहिता लागू होने के बाद मतदान केंद्र के 100 मीटर के अंदर प्रचार नहीं हो सकता। 200 मीटर के अंदर अस्थायी पार्टी ऑफिस या ज्यादा बैनर नहीं लगा सकते। मतदान दिवस पर हथियार लेकर जाना मना होता है।वाहन परमिट रिटर्निंग अधिकारी से लेना जरूरी।
आचार संहिता लागू होने के बाद रैलियां, सभाएं और जुलूस के लिए पुलिस से पहले अनुमति लेनी जरूरी होती है। सुबह 6 बजे से पहले और रात 10 बजे के बाद सभाएं नहीं हो सकती। लाउडस्पीकर रात 10 से सुबह 6 बजे तक बंद रहने चाहिए। मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पूरी तरह बंद होना चाहिए। कोई भी दल या नेता इन नियमों को तोड़ता है तो आयोग तुरंत इस पर एक्शन लेता है।
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