हेल्थ डेस्क। AI ने कई चीजों को आसान किया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गुगल और एआई इंसान बन गया है; पर लोग इस बात को नहीं समझते हैं। कुछ लोग गुगल और एआई से हेल्थ संबंधी समस्याओं का इलाज पूछते हैं और उसके अनुसार अपना इलाज कर बैठते हैं। इनमें से कई लोगों को जान जोखिम में डालना पड़ता है। ऐसे कई मामले चर्चा में रहे हैं।
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कई बार लोग गलत बीमारी समझकर ऐसी दवाएं ले लेते हैं, जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं होती। इन दवाओं के गंभीर साइड इफेक्ट सामने आते हैं, जिनका इलाज बाद में करना पड़ता है। ऐसे कई मरीज अस्पताल में आते हैं, जिन्होंने पहले कहीं और से या खुद से दवा ली होती है लेकिन बीमारी ठीक होने के बजाय और बढ़ जाती है। बाद में वे गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज कठिन हो जाता है।

किसी भी बीमारी की स्थिति में स्वयं दवा लेने से बचें और नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर डॉक्टर से परामर्श लें। सरकारी अस्पतालों में जांच, चिकित्सा परामर्श और दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। सही समय पर योग्य डॉक्टर से इलाज कराने से बेहतर और सुरक्षित उपचार संभव है। बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं लेना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के ऐसी दवाइयां नहीं दी जातीं, जिन पर पाबंदी है या जिनके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है। इंटरनेट या एआई के माध्यम से दवाइयों की जानकारी लेना अलग बात है, लेकिन उसके आधार पर खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है। कई बार लोग ऐसी दवाओं की मांग कर देते हैं, जिनका उपयोग बिना मेडिकल जांच के नहीं किया जाना चाहिए।
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