लाइफस्टाइल डेस्क। अगर कोई बचपन से मोटापे का शिकार हो जाए, तो जवानी और बुढ़ापे में बीमारी की पटकथा पहले से ही तैयार हो जाती है। Diabetes, कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बढ़ते बोझ और हर साल इससे होने वाली लाखों के मौतों के पीछे मोटापे की केंद्रीय भूमिका होती है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, अत्यधिक और असंतुलित रूप से शरीर में वसा के जमाव को मोटापा कहा जाता है। इसे बॉडी मास इंडेक्स (व्यक्ति के कुल वजन (किग्रा.) में लंबाई (वर्ग मी.) से भाग देकर प्राप्त किया जाता है) मापा जाता है। गत वर्ष लांसेट कमीशन ने मोटापे के दो श्रेणियों में विभाजित कर दिया- क्लीनिक मोटापा और प्री-क्लीनिकल मोटापा। नई परिभाषा में वजन, लंबाई, कमर का घेरा, मांसपेशियों के द्रव्यमान और अन्य अंगों की कार्यक्षमता आदि को भी शामिल किया गया है।

उच्च कैलोरी वाले स्नैक्स, शुगर ड्रिंक्स, फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड जैसे कारण बच्चों में मोटापे का कारण बन रहे हैं। सोने-जागने का समय तय नहीं होने और खराब नींद के चलते मेटाबोलिज्म प्रभावित होता है। अधिक भूख लगने के कारण लोग उच्च कैलोरी वाला भोजन लेने लगते हैं। नींद सही नहीं होने से बच्चों को थकान लगती है, जिससे शारीरिक गतिविधियों से दूर भागते हैं।
बच्चों को पैकेटबंद भोजन के बजाय फलों, सब्जियों और अनाज खाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। अधिक मीठे स्नैक्स या ड्रिंक्स के बजाय प्राकृतिक विकल्पों पर गौर करना चाहिए।बाहर के बजाय बच्चों को घर में बना भोजन खिलाना चाहिए। साइकिलिंग, स्किपिंग, रनिंग जैसी शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए। बैठकर टीवी देखने या गेम खेलने के बजाय उन्हें एक्टिव रहने वाले कार्यों में लगाना चाहिए। बच्चों के सोने-जागने के समय तय करें और सोने से पहले इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों से दूर रखें।
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