नई दिल्ली। भारतीय संविधान के तहत Governor को हटाने की प्रक्रिया कई दूसरे संवैधानिक पदों की तुलना में काफी आसान है। राष्ट्रपति या फिर ऊपरी अदालतों के जजों के उलट गवर्नर को पद से हटाने के लिए इंपीचमेंट कि कार्रवाई की जरूरत नहीं होती। गवर्नर की नियुक्ति और हटाने के नियम भारत के संविधान के आर्टिकल 156 में बताए गए हैं।
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भारत के राष्ट्रपति के पास किसी भी समय गवर्नर को पद से हटाने का पूरा अधिकार है। संविधान में इस कार्रवाई के लिए पार्लियामेंट्री वोट या फिर इंपीचमेंट जैसी किसी भी फॉर्मल प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। गवर्नर को हटाने की प्रक्रिया की एक खास बात यह है कि संविधान में हटाने का कोई भी खास आधार नहीं है।

संवैधानिक पदों के उलट जहां पर गलत काम, नाकाबिलियत या फिर कानून का उल्लंघन साबित होना जरूरी है, एक गवर्नर को टेक्निकल बिना किसी बताए कारण की भी हटाया जा सकता है। इससे केंद्र सरकार को यह तय करने में काफी फ्लैक्सिबिलिटी मिलती है कि गवर्नर को पद पर बने रहना चाहिए या फिर नहीं। एक गवर्नर अपनी मर्जी से भी पद को छोड़ सकता है। ऐसी स्थिति में गवर्नर भारत के राष्ट्रपति को इस्तीफा देता है।
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद गवर्नर का कार्यकाल खत्म हो जाता है और केंद्र सरकार उस पद पर किसी नए व्यक्ति को नियुक्त करती है। एक और जरूरी बात यह है कि गवर्नर को हटाने के लिए इंपीचमेंट की जरूरत नहीं होती। भारत के प्रेसिडेंट के उलट जिन्हें सिर्फ पार्लियामेंट में एक मुश्किल इंपीचमेंट प्रोसेस के जरिए हटाया जा सकता है, गवर्नर को हटाना पूरी तरह से सेंट्रल लेवल पर लिया गया एक एग्जीक्यूटिव फैसला है।
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